स्व. शंकरलाल मेहरोत्रा के 79वें जन्मदिन पर बुंदेलों ने बुंदेलखंड दिवस के रूप में मनाया
महोबा। बुंदेलखंड राज्य निर्माण आंदोलन के जनक स्व. शंकरलाल मेहरोत्रा के 79वें जन्मदिन पर सोमवार को बुंदेलों ने बुंदेलखंड दिवस के रूप में मनाया। इस मौके पर खून से खत लिखों अभियान चलाकर बुंदेलों ने अपने खून से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को 51वीं बार खत लिखकर भेजा, जिसमें उत्तर प्रदेश व मध्य प्रदेश के 14 जिलों को पुनः मिलाकर पृथक बुंदेलखंड राज्य बनाने की मांग को एक बाद फिर से दोहराई गई।
आल्हा चौक के आंबेडकर पार्क में आयोजित प्रधानमंत्री के नाम खून से खत लिखो अभियान में बुंदेली समाज के संयोजक तारा पाटकर ने कहा कि बुंदेलखंड राज्य निर्माण के मुद्दे पर राजनीति दलों की चुप्पी बेहद चिंताजनक है और इसके लिए यहां के सांसद, विधायक दोषी हैं, जो पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के सामने प्रभावी तरीके से मुद्दा उठाने से डरते हैं, लेकिन तेलंगाना की तरह बुंदेलखंड के सांसद, विधायकों को भी साहस दिखाना होगा। वहां राज्य निर्माण के लिए एक महीने में 96 जनप्रतिनिधियों ने इस्तीफे दे दिये थे। इसलिए अब बिना कुर्बानी दिये आंदोलन में गति आने वाली नहीं। बताया कि बुंदेलों ने अपने खून से अब तक दो हजार से अधिक खत लिख चुके हैं।
कहा कि हम लोग आंदोलन को अपने खून से सींच रहे हैं और मैं जूते-चप्पल त्याग कर 2015 से लगातार नंगे पैर चल रहे हैं और इसी आल्हा चौक पर कोरोना काल के पहले 635 दिन तक अन्न त्याग सत्याग्रह कर चुके हैं। महामंत्री डा. अजय बरसैंया ने कहा कि आंदोलन के लिए जितनी कुर्बानी शंकर लाल मेहरोत्रा ने दी, किसी ने नहीं दी। अगर 22 नवंबर, 2001 को अचानक उनका निधन न हुआ होता तो बहुत पहले बुंदेलखंड राज्य बन गया होता। इस मौके पर भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के जिलाध्यक्ष दिलीप जैन, कृष्णा शंकर जोशी, कैप्टन देवीदीन यादव, गया प्रसाद कोस्टा, हरीओम निषाद, अमरचंद विश्वकर्मा, कुक्कू शिवहरे, देवेन्द्र, नीरज पुरवार, महेन्द्र, प्रेम चौरसिया, सुधीर दुबे, सिद्धे सेन, भटका गुरू, कमलेश श्रीवास्तव, सुरेश सहित तमाम बुंदेलों ने अपने रक्त से प्रधानमंत्री को खत लिखे।





