जलालपुर, अंबेडकरनगर तहसील जलालपुर क्षेत्र के मौज लखनिया, पोस्ट बड़ेपुर, थाना सम्मनपुर में मरहूम सैयद हुसैन बांदी बिन्ते सैयद विलायत हुसैन की याद में एक भव्य मजलिस का आयोजन अकीदत और एहतराम के साथ किया गया। मजलिस में क्षेत्र सहित आसपास के गांवों से हजारों की संख्या में अकीदतमंदों ने शिरकत की।
कार्यक्रम की शुरुआत मीर तालिब अब्बास (कटघर कमाल) द्वारा क़ुरआन-ए-पाक की आयतों की तिलावत से हुई। इसके पश्चात जनाब सैयद इंतजार अब्बास साहब (लोरपुर) ने इमाम हुसैन (अ.) की जीवनी पर प्रकाश डालते हुए सत्य, न्याय और इंसानियत के मार्ग पर चलने का संदेश दिया।
मौलाना सैयद ओन अब्बास (लखनिया) ने हज़रत फातिमा ज़हरा (स.) के जीवन, त्याग और आदर्शों पर विस्तार से चर्चा की। वहीं ज़ाहिद कर्बलाई ने हज़रत अब्बास (अ.) की शहादत, बहादुरी और वफ़ादारी का भावपूर्ण वर्णन किया। मौलाना आसिम रिज़वी साहब ने भी अपने विचार रखे।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता मौलाना सैयद असद यावर साहब (बिहार) रहे, जिनके बयान को सुनने के लिए भारी संख्या में लोग उमड़े। उन्होंने शिक्षा के महत्व पर ज़ोर देते हुए कहा कि “माँ की गोद से कब्र तक इल्म हासिल करना हर मुसलमान का फ़र्ज़ है।”
उन्होंने विशेष रूप से युवाओं और अभिभावकों से अपील की कि बच्चों को बेहतर शिक्षा दिलाएं, क्योंकि शिक्षा ही समाज की तरक्की और मजबूती की बुनियाद है।
ग़मगीन माहौल में मौलाना असद यावर साहब ने इमाम हुसैन (अ.) और रसूल-ए-अकरम ﷺ के जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं पर रोशनी डालते हुए इंसानियत, भाईचारे और ज्ञान की अहमियत को रेखांकित किया। वहीं जाहिद जलालपुर ने अपने अंदाज़ में इमाम हुसैन (अ.) की शान में भावपूर्ण ख़ुत्बा पेश किया।
मजलिस में मरहूम सैयद हुसैन बांदी के तीनों पुत्र—लाडले साहब, पप्पू साहब और आतिशम साहब (संयोजक) मौजूद रहे। इसके अलावा ग्राम सभा लखनिया के पूर्व प्रधान अली अंसार, सफदर अब्बास, कोटेदार कुमैल अब्बास, अली अब्बास, मिनाल मोहम्मद, सैयद जफर, सैयद शहंशाह मोहम्मद आज़म, सैयद बाक़र सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे। सम्मनपुर से मास्टर हुसैन अली, मसूद भाई तथा दूर-दराज़ से आए पत्रकारों और मेहमानों ने भी मजलिस में शिरकत की।
मजलिस के अंत में मरहूम सैयद हुसैन बांदी के लिए दुआ-ए-मग़फिरत की गई। आयोजन में आसपास के कई गांवों से हजारों अकीदतमंद शामिल हुए।





