रामपुर जौहर विश्वविद्यालय को लेकर चल रही कानूनी और प्रशासनिक खींचतान के बीच अब स्थानीय प्रबुद्ध वर्ग और व्यापारी संगठनों ने अपनी आवाज बुलंद की है। विश्वविद्यालय की इमारतों के नक्शे पास न होने के मुद्दे पर जहाँ प्रशासन अपनी कार्यवाही जारी रखे हुए है, वहीं हल्लौर व्यापार मंडल के अध्यक्ष अर्शी रिजवी ने एक मार्मिक अपील करते हुए सरकार से छात्रों के भविष्य को सुरक्षित रखने का अनुरोध किया है।
विश्वविद्यालय के निर्माण को लेकर चल रहे विवाद में प्रशासन का तर्क है कि परिसर की 38 इमारतों के नक्शे पास नहीं हैं और ये सरकारी भूमि पर अतिक्रमण कर बनाई गई हैं। इस आधार पर प्रशासनिक स्तर पर विध्वंस और भूमि अधिग्रहण की कार्यवाही की जा रही है।
व्यापार मंडल ने पेश किया मानवीय पक्ष
इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए हल्लौर व्यापार मंडल के अध्यक्ष ने कहा, “मैं यह मानता हूं कि विश्वविद्यालय की 38 इमारतों का नक्शा पास नहीं है, लेकिन मैं सरकार से विनम्र निवेदन करना चाहता हूं कि यह स्थान एक ‘शिक्षा का मंदिर’ है। यहाँ हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई—सभी वर्गों के छात्र शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं।”
उन्होंने प्रशासन से आग्रह किया कि केवल कागजी और कानूनी बिंदुओं को न देखा जाए, बल्कि हजारों छात्रों के शैक्षणिक भविष्य को ध्यान में रखते हुए कोई वैकल्पिक रास्ता निकाला जाए। उन्होंने जोर दिया कि कानून का पालन जरूरी है, लेकिन विध्वंस किसी भी समस्या का अंतिम समाधान नहीं होना चाहिए।
व्यापार मंडल के अध्यक्ष का यह बयान क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। लोग प्रशासनिक सख्ती और शैक्षिक संस्थानों की सुरक्षा के बीच संतुलन की मांग कर रहे हैं। अब देखना यह है कि क्या शासन और प्रशासन इस मामले में कोई सहानुभूतिपूर्ण रुख अपनाते हुए विद्यार्थियों के हित में विचार करते हैं या नहीं।





