HomeBusinessमहंगे कच्चे तेल और वैश्विक तनाव से बढ़ी चिंता

महंगे कच्चे तेल और वैश्विक तनाव से बढ़ी चिंता

नई दिल्ली। भारतीय रुपये पर एक बार फिर दबाव बढ़ गया है। 18 अगस्त 2026 को रुपया करीब ₹95.68 प्रति डॉलर पर बंद हुआ। बढ़ते कच्चे तेल के दाम, अमेरिका की ऊंची बॉन्ड यील्ड और पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव ने डॉलर की मांग बढ़ाई है।

99 रुपये तक पहुंचने का क्या है गणित?

विश्लेषकों के मुताबिक रुपये के लिए ₹97 प्रति डॉलर का स्तर मार्च 2027 तक और ₹99 प्रति डॉलर का स्तर मार्च 2028 तक संभव माना गया है। यानी ₹99 का अनुमान तत्काल गिरावट की भविष्यवाणी नहीं, बल्कि मौजूदा जोखिम लंबे समय तक बने रहने की स्थिति का एक संभावित परिदृश्य है।

तेल महंगा तो रुपये पर दबाव क्यों?

भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होता है, तो भारतीय कंपनियों को तेल खरीदने के लिए ज्यादा डॉलर चाहिए। इससे डॉलर की मांग बढ़ती है और रुपये पर दबाव आता है।

फिलहाल ब्रेंट क्रूड करीब $91-92 प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया है। पश्चिम एशिया में तनाव और अमेरिका-ईरान बातचीत में अनिश्चितता ने तेल बाजार में जोखिम प्रीमियम बढ़ाया है।

व्यापार घाटा भी चिंता

जुलाई 2026 में भारत का व्यापार घाटा बढ़कर $31.98 अरब हो गया। महंगे तेल और बढ़ते आयात ने इस घाटे को बढ़ाने में भूमिका निभाई। हालांकि भारत के सेवा निर्यात और विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत स्थिति में हैं।

RBI के हस्तक्षेप से फिलहाल राहत

रिजर्व बैंक रुपये को स्थिर रखने के लिए विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप कर रहा है। भारत का विदेशी मुद्रा भंडार $700 अरब से अधिक है, जिससे तत्काल दबाव से निपटने की क्षमता मजबूत है।

निष्कर्ष: ₹99 प्रति डॉलर का स्तर संभव है, लेकिन यह तय नहीं है। यदि तेल लंबे समय तक महंगा रहता है, वैश्विक जोखिम बढ़ते हैं और डॉलर की मांग मजबूत बनी रहती है, तो रुपये पर दबाव बढ़ सकता है। वहीं तेल की कीमतों में नरमी और वैश्विक तनाव कम होने पर रुपया संभल भी सकता है।

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