Commercial LPG Cylinders: मानीटरिंग भी राउंड द क्लाक की जाएगी। एजेंसी संचालकों से हर घंटे का डाटा लिया जाएगा।
लखनऊ। राजधानी में कमर्शियल एलपीजी सिलिंडर की स्थिति मंगलवार से कुछ ठीक होना शुरू हो जाएगी। यही नहीं पांच से सात दिन में पूरी तरह से कमर्शियल सिलिंडर का संकट खत्म हो जाएगा। प्रशासनिक अधिकारियों ने यह दावा किया है।
अफसरों के मुताबिक कमर्शियल सिलिंडर न मिलने से होटल, रेस्टोरेंट, मेस, उद्योग प्रभावित हुए है। अब इन्हें सुचारू रूप से संचालित करने के लिए सिलिंडर देने दिए जाएंगे। इनमें व्यवस्था बनाई जा रही है कि जिनकी बुकिंग पहले की है, उन्हें पहले दिए जाएंगे।
बुकिंग अंतराल को लेकर भी स्थितियां और स्पष्ट कर दी जाएगी। उद्देश्य होगा कि जो स्थिति अभी है, वह हर दिन सुधरे। पांच से सात दिन में स्थिति को पूरी तरह से सामान्य करने का लक्ष्य रखा गया है।
कमर्शियल सिलिंडर की आपूर्ति प्रभावित होने के कारण स्थिति राजधानी की हर दिन बिगड़ती जा रही है। प्रशासन ने सभी गैस एजेंसियों का डाटा एकत्रित करके चरणबद्ध तरीके से कमर्शियल सिलिंडर देने का निर्णय किया है। अफसरों का तर्क है कि जरूरत के हिसाब से ही कमर्शियल सिलिंडर दिए जाएंगे, जमाखोरी किसी भी कीमत पर नहीं करने दी जाएगी।
ऐसे लोगों पर नजर रखने के लिए टीमें बनाई गई हैं, जो देखेंगी कि कमर्शियल सिलिंडर की खपत वास्तव में उनके प्रतिष्ठान में उतने की है, जितनी की बुकिंग कराई गई है। ऐसा न मिलने पर उपभोक्ता पर कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासन का उद्देश्य है कि राजधानी में कमर्शियल सिलिंडर आते ही अधिक से अधिक लोगों का दिए जा सके। ऐसा न हो कि एक उपभोक्ता ज्यादा कमर्शियल सिलिंडर बुक करा लें और दूसरे को मिले ही न। इसकी मानीटरिंग भी राउंड द क्लाक की जाएगी। एजेंसी संचालकों से हर घंटे का डाटा लिया जाएगा।
राजधानी में अस्सी हजार पीएनजी कनेक्शन धारक है। इनमें भी बड़ी संख्या में लोगों ने घरेलू सिलिंडर की बुकिंग कराई है। ऐसे उपभोक्ताओं को भी गैस नहीं मिली है, जो अपना सिलिंडर आपात स्थिति के लिए भराकर रखना चाहते हैं। इन ग्राहकों में कुछ ऐसे हैं, जिन्होंने दो दो वर्ष बाद गैस बुक कराई है।
शादियों का सीजन खत्म, कमर्शियल की डिमांड कम
राजधानी में शादियों का सीजन खत्म हो गया है। कमर्शियल सिलिंडर को लेकर कैटर्स को जो समस्या झेलनी पड़ रही थी, वह फिलहाल नहीं है। अब कोई कैटर्स कोई सेमिनार व अन्य काम करता है तो वह अलग बात है। फिलहाल जो डिमांड 14 मार्च तक थी, उसकी चौथाई भी डिमांड कमर्शियल सिलिंडर की नहीं बची है। कैटर्स शादियों में दस से बारह सिलिंडर आम तौर पर प्रयोग करता ही है।
भट्टियों के सहारे होटल व रेस्टोरेंट
राजधानी के कई होटल व रेस्टोरेंट भट्टियों के सहारे चलते रहे। होटल संचालकों ने भट्टियों को खुले में रखकर खाना बनवाया। वहीं ठेले वालों ने भी छोटी भट्टियों का सहारा लेना शुरू कर दिया है। कोयला व लकड़ी के सहारे व्यापार को गति देने का काम कर रहे हैं। शहीद पथ के ढाबा संचालकों का तर्क है कि अगर भट्टी नहीं रखेंगे तो ग्राहक टूट जाएगा। ग्राहक कम आए वह मंजूर है लेकिन बिल्कुल न आए तो खर्चा कैसे निकलेगा।





