लखनऊ में रेशम उद्योग को मजबूती देने के लिए ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ का उद्घाटन किया गया है। यह केंद्र ‘साइल टू सिल्क’ की पूरी प्रक्रिया को प्रदर्शित करेगा, शुद्ध रेशम की पहचान सिखाएगा और बुनकरों व किसानों को विपणन मंच प्रदान करेगा। मंत्री राकेश सचान ने बताया कि यह एमएसएमई इकाइयों को रोजगार देने में सहायक होगा और प्रदेश में रेशम उत्पादन को बढ़ाने का लक्ष्य है।
लखनऊ। रेशम उद्योग को मजबूती देने के लिए रेशम निदेशालय परिसर में ‘सेंटर आफ एक्सीलेंस’ स्थापित किया गया है। यह केंद्र रेशम उत्पादन की पूरी प्रक्रिया को एक ही स्थान पर दिखाएगा और शुद्ध रेशमी वस्त्रों की पहचान व विपणन का मंच बनेगा।
यहां एरी, शहतूती और टसर रेशम की उत्पादन प्रक्रिया को करीब से समझा जा सकेगा। ‘साइल टू सिल्क’ की पूरी यात्रा नर्सरी विकास, शहतूत रोपण, रेशम कीट पालन, कोया उत्पादन, धागाकरण से लेकर साड़ी और परिधान निर्माण तक का चरणबद्ध प्रदर्शन होगा।
इस केंद्र पर उपभोक्ताओं को शुद्ध रेशम की पहचान और नकली रेशम से बचने की जानकारी भी मिलेगी। यह प्रदर्शनी और मार्केटिंग कम सेल सेंटर के रूप में भी काम करेगा, जिससे बुनकरों, कारीगरों, किसानों और स्वयं सहायता समूहों को सीधा बाजार मिलेगा।
इसका उद्घाटन करते हुए रेशम उद्योग, हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग मंत्री राकेश सचान ने कहा कि प्रदेश में लगभग एक करोड़ एमएसएमई इकाइयां कार्यरत हैं और यह क्षेत्र सबसे अधिक रोजगार देता है। वर्ष 2022 से रेशम उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं।
वर्तमान में प्रदेश में 300 से 350 मीट्रिक टन रेशम उत्पादन हो रहा है, जिसे आगे बढ़ाने का लक्ष्य है। किसानों को प्रशिक्षण देकर रेशम उत्पादन से जोड़ा जा रहा है, ताकि उन्हें अतिरिक्त आय मिले।
अपर मुख्य सचिव, उद्यान एवं रेशम विभाग, विशेष सचिव निदेशक (रेशम), केंद्रीय रेशम बोर्ड के अधिकारी, वैज्ञानिक और अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।





