एक नई रिपोर्ट के अनुसार, बिना धुएं वाले तंबाकू उत्पाद सिगरेट से कम हानिकारक हैं, क्योंकि वे जलने से निकलने वाले 7,000 से अधिक जहरीले रसायनों से बचाते हैं।
हाल ही में फ्रांस की एक नई तंबाकू रिपोर्ट (एएनएसइएस) सामने आई है, जिसने सार्वजनिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक नई चर्चा छेड़ दी है। इस रिपोर्ट के अनुसार, बिना धुएं वाले तंबाकू उत्पाद पारंपरिक सिगरेट की तुलना में कम नुकसानदेह हैं।
यह नया शोध भारत के सार्वजनिक स्वास्थ्य दृष्टिकोण पर भी गहरा प्रभाव डाल सकता है। विशेष रूप से यह उन लोगों के लिए मददगार साबित हो सकता है जो सिगरेट छोड़ने की कोशिश कर रहे हैं और इसके नुकसान को कम करना चाहते हैं।
क्यों हैं ये सिगरेट से कम खतरनाक?
एएनएसइएस (ANSES) ने 2,500 से अधिक वैज्ञानिक प्रकाशनों का गहराई से अध्ययन करने के बाद यह निष्कर्ष निकाला है। रिपोर्ट स्पष्ट रूप से कहती है कि बिना धुएं वाले तंबाकू उत्पाद पूरी तरह से सुरक्षित तो नहीं हैं, लेकिन ये सिगरेट जलने से पैदा होने वाले 7,000 से अधिक जहरीले रसायनों से इंसान को बचाते हैं। ये वही रसायन हैं जो हमारे श्वसन तंत्र को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाते हैं।
शोधकर्ताओं ने बताया कि दशकों के शोध से सिगरेट के विनाशकारी प्रभाव पूरी तरह से साबित हो चुके हैं। इसके विपरीत, बिना धुएं वाले उत्पादों के दीर्घकालिक नुकसानों को अभी केवल ‘संभावित’ माना गया है, क्योंकि सिगरेट की तरह इनके लंबे समय के आंकड़े अभी निर्णायक रूप से सिद्ध नहीं हुए हैं।
हृदय रोगियों पर दक्षिण कोरियाई अध्ययन
इस दिशा में फ्रांस के बाहर भी शोध हुए हैं। ‘यूरोपीय कार्डियोलॉजी जर्नल’ में प्रकाशित दक्षिण कोरिया के एक राष्ट्रीय अध्ययन में एक बेहद अहम बात सामने आई है। इस अध्ययन में पाया गया कि जो हृदय रोगी पारंपरिक सिगरेट छोड़कर पूरी तरह से बिना धुएं वाले तंबाकू उत्पादों को अपना लेते हैं, उनके हृदय रोगों के जोखिम में उतनी ही कमी आती है जितनी कि सिगरेट को पूरी तरह से छोड़ने पर आती है। शोधकर्ताओं ने इसका मुख्य कारण टार और कार्बन मोनोऑक्साइड की अनुपस्थिति को बताया है, जो सीधे हमारी रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाते हैं।
‘नुकसान में कमी’ की ओर बढ़ता दुनिया का नजरिया
दुनिया भर के कई देश अब तंबाकू उत्पादों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की नीति से हटकर एक नए रास्ते पर चल रहे हैं। सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ इस नए दृष्टिकोण को ‘नुकसान में कमी’ के रूप में देखते हैं। भारत के व्यापक सार्वजनिक स्वास्थ्य संदर्भ को देखते हुए, इस नए शोध और इसके परिणामों पर सावधानीपूर्वक विचार करना भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।





