भारत ने ऑपरेशन सिंदूर और गलवान झड़प के बाद अपनी सुरक्षा रणनीति बदली है। ड्रोन घुसपैठ रोकने के लिए पाकिस्तान और बांग्लादेश सीमा पर एंटी-ड्रोन निगरानी शुरू की गई है।
भारत ने ऑपरेशन सिंदूर और गलवान झड़प के बाद अपनी सुरक्षा रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। ड्रोन घुसपैठ और सीमा पार की चुनौतियों को देखते हुए भारत अब पाकिस्तान और बांग्लादेश बॉर्डर पर एंटी-ड्रोन, सेंसर और लेजर की मदद से निगरानी शुरू कर दी है।
वहीं, लद्दाख में चीन बॉर्डर पर 29 नए आउटपोस्ट बनाने के साथ भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) की पेट्रोलिंग 3 गुना बढ़ा दी गई है।
गृह मंत्रालय की ऐन्यूअल रिपोर्ट 2024-25 के मुताबिक, भारत-पाकिस्तान बॉर्डर पर असम के धुबरी में 5-5 किमी इलाके में ‘कंप्रीहेंसिव इंटीग्रेटेड बॉर्डर मैनेजमेंट सिस्टम’ के दो पायलट प्रोजेक्ट शुरू किए गए हैं। वहीं, म्यांमार सीमा पर अरुणाचल प्रदेश और मणिपुर में ‘हाइब्रिड सर्विलांस सिस्टम’ के तहत काम शुरू किया गया है।
पहली बार एंटी-ड्रोन सिस्टम से निगरानी
सीमाओं पर ड्रोन के बढ़ते ड्रोन खतरों को देखते हुए सुरक्षा बलों को स्पेशल ट्रेनिंग और आधुनिक उपकरण ( एंटी-ड्रोन सिस्टम) दिए जा रहे हैं। यह उपकरण अवैध ड्रोन/हवाई घुसपैठ का पता लगाने और उसे खत्म करने में प्रभावी हैं।
सीमावर्ती इलाकों की मैपिंग
GIS लेयर और पीएम गति शक्ति पोर्टल का इस्तेमाल सीमावर्ती बुनियादी ढांचे की सटीक मैपिंग और रणनीतिक योजना बनाने के लिए किया जा रहा है। पीएम गति शक्ति पोर्टल और स्पेस मैपिंग की मदद से संवेदनशील इलाकों की सटीक निगरानी की जा रही है।
चीन बॉर्डर पर बढ़ाई गई पेट्रोलिंग
चीन सीमा पर ITBP ने 2022 से 2024 के बीच 29 नए बॉर्डर आउटपोस्ट बनाए हैं। जिसके बाद आउटपोस्ट की कुल संख्या 209 हो गई है। आउटपोस्ट की संख्या में बढ़ोत्तरी जून 2020 में पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में हुई झड़प के बाद की गई है।
गृह मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक, 2017-18 में ITBP औसतन 173 पेट्रोलिंग प्रति माह करता था। वहीं, 2023-24 में यह संख्या बढ़कर करीब 500 प्रति माह हो गई, यानी करीब 3 गुना बढ़ोतरी हुई है।





