अलीगढ़। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के संस्थापक और आधुनिक भारत के निर्माताओं में शामिल सर सैयद अहमद खान की 208वीं जयंती पर आयोजित एक भव्य स्मृति समारोह को सम्बोधित करते हुए मुख्य अतिथि इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायाधीश, अब्दुल शाहिद ने कहा कि “सर सैयद अहमद खान द्वारा प्रज्वलित दीप हमेशा हमारा मार्गदर्शन करेगा, हमारे विचारों को प्रेरित करेगा, और याद दिलाएगा कि एक जागरूक व्यक्ति लाखों लोगों के भाग्य को बदल सकता है। अपने 41 वर्ष के अनुभव काल का उल्लेख करते हुए न्यायाधीश शाहिद ने शिक्षा, लगन और नैतिक उद्देश्य की शक्ति पर प्रकाश डाला, जो व्यक्ति को उसके सपनों की प्राप्ति में सक्षम बनाती है।
उन्होंने सर सैयद का संदेश दोहराया कि “किसी राष्ट्र की प्रगति के लिए सबसे पहला आवश्यक तत्व समाज के विभिन्न वर्गों में भाईचारा और एकता है” और “अज्ञानता गरीबी की जननी है, और शिक्षा इसका एकमात्र समाधान है।”
उन्होंने छात्रों को अपने लक्ष्यों के प्रति प्रतिबद्ध रहने और निरंतर सीखने, बुरी आदतों को छोड़ने और हतोत्साह को प्रेरणा का स्रोत मानने की सलाह दी। न्यायाधीश महोदय ने सर सैयद और उनके पुत्र न्यायाधीश सैयद महमूद के योगदान को न्यायिक और राष्ट्र निर्माण में रेखांकित किया और छात्रों को ईमानदारी, समर्पण और धैर्य के मूल्यों को अपनाने के लिए प्रेरित किया।
मानद अतिथि इसरो के पूर्व अध्यक्ष और चाणक्य विश्वविद्यालय, बेंगलुरु के चांसलर डॉ. एस. सोमनाथ ने अपने सम्बोधन में सर सैयद के दृष्टिकोण की सराहना की, जिसमें उन्होंने विश्वास के साथ तर्क और आधुनिक विज्ञान के साथ नैतिक मूल्यों को जोड़कर समाज निर्माण की दिशा में शिक्षा को एक महत्वपूर्ण साधन बताया। उन्होंने कहा कि ज्ञान की खोज, चाहे विज्ञान के माध्यम से हो या आध्यात्मिक चिंतन के माध्यम से, जिज्ञासा, सहयोग और नैतिक उद्देश्य की प्राप्ति की यात्रा है।
विशेष अतिथि, पेंगुइन रैंडम हाउस की वरिष्ठ उपाध्यक्ष और प्रकाशक, मिलि ऐश्वर्या ने सर सैयद के ज्ञान, समावेशिता और शिक्षा के माध्यम से सशक्तिकरण के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे अपनी जड़ों से जुड़े रहें और उच्च लक्ष्य निर्धारित करें। उन्होंने धैर्य, परिश्रम और निरंतर प्रयास को महानता की कुंजी बताया।





