Thursday, January 22, 2026
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एमआरएलबी म्युचुअल वैनीफिट निधि का डायरेक्टर बनकर लाखों रुपये हड़पने का आरोप

पुलिस ने नहीं लिखी शिकायत तो महिला ने ली न्यायालय की शरण, अब मुकद्दमा दर्ज

ललितपुर। वसुन्धरा कालोनी भैंरो बाबा के पीछे सिविल लाइन निवासी राधा पत्नी रजनंदन ने एडीजे एस.सी.एस.टी. एक्ट न्यायालय में वाद दायर किया है। राधा ने कोर्ट को बताया कि 15 फरवरी 2024 को सुबह 9.30 बजे वह अपने पति रजनंदन, ससुर कमलदास, सास रामप्यारी व बच्चों के साथ घर पर थी। तभी नईबस्ती चिरागशाह के पास रहने वाले आशीष, शुभम पुत्रगण जगमोहन उर्फ बृजमोहन नामदेव आये और अपने आप को एमआरएलबी म्युचुअल वैनीफिट निधि का डायरेक्टर बताते हुये उसे व उसके पति को खाता खुलवाने के लिए प्रेरित किया।

15 फरवरी को उसके पति से 3 हजार रुपये, 29 फरवरी को उससे 7 हजार रुपये लिये व दोनों को एक फर्जी रिकरिंग डिपोजिट पासबुक बनाकर दी। इसके बाद 29 फरवरी को उसे विश्वास में लेकर एक लाख रुपये फिक्स डिपोजिट सर्टिफिकेट के लिए लिया और एक फर्जी फिक्स डिपोजिट सर्टिफिकेट बनाकर दिया। इसके बाद 3 अप्रैल 2024 को उसके पति से 3 हजार व उससे 7 हजार रुपये, 8 मई को उससे 7 हजार रुपये पति से 6 हजार रुपये, 6 जून, 24 जुलाई को उससे रुपये लिये गये। महिला के अनुसार कुल 1 लाख 53 हजार रुपये उससे व उसके पति से लिये गये। बचत पत्रों के अनुसार उक्त राशि 28 फरवरी 2025 को ब्याज सहित प्राप्त होनी थी।

लेकिन समय बीतने के बाद उक्त लोगों ने रुपया नहीं दिया। वह अपने पति के साथ इलाइट चौराहा के पास परिवार पैलेस स्थित उसके कार्यालय पहुंचे तो पता चला कि कार्यालय बंद हो गया। उसने फोन कर रुपये देने की बात कही तो आशीष ने जल्द रुपये दिलाने का आश्वासन दिया, लेकिन कई बार रुपये मांगने पर रुपये नहीं लौटाये। आरोप है कि 31 जुलाई 2025 को सुबह करीब 9 बजे वह अपने पति, सास के साथ आशीष व शुभम के घर पहुंची, जहां दोनों ने अपने पिता जगमोहन उर्फ बृजमोहन, मां सुनीता के साथ रुपये मांगने पर गालियां दीं और रुपये मांगने पर जान से मारने की धमकी दी।

मामले की शिकायत करने वह कोतवाली जा रही थी तो उक्त लोगों ने रास्ता रोकते हुये जान से मारने की धमकी दी। 4 अगस्त को मामले की शिकायत एसपी से रजिस्टर्ड डाक से की गयी, लेकिन कार्यवाही न होने न्यायालय की शरण लेनी पड़ी। न्यायालय के आदेश पर कोतवाली पुलिस ने उक्त लोगों के खिलाफ बीएनएस की धारा 318 (4), 338, 336 (3), 340 (2), 352, 351 (3) व एस.सी.एस.टी. एक्ट की धारा 3 (1)(द), 3 (1)(घ) के तहत मुकद्दमा दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी।

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