Saturday, May 9, 2026
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आयुर्वेद के मुताबिक क्या है सूखे मेवे खाने का सही तरीका? सेहत के लिए संजीवनी हैं ये ड्राई फ्रूट्स

इस आर्टिकल में आप आयुर्वेद के अनुसार विभिन्न सूखे मेवों जैसे बादाम, अखरोट, खजूर, काजू और किशमिश के फायदे और इन्हें डाइट में शामिल करने का सही तरीका जानेंगे।

सूखे मेवे या नट्स प्रोटीन, आयल, विटामिन और खनिजों के छोटे पैकेज की तरह होते हैं, जो शरीर की वृद्धि व सेहतमंद रहने के लिए आवश्यक हैं। शरीर के पोषण के लिए फलों को संतुलित आहार का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। ये न केवल आवश्यक विटामिन और खनिजों से भरपूर होते हैं, बल्कि ऊर्जा के अच्छे स्रोत भी हैं, जो कि फल ताजे या सूखे रूप में प्रयोग किए जाते हैं।

आइए, डॉ. आर. वात्स्यायन आयुर्वेदाचार्य, संजीवनी आयुर्वेदशाला, लुधियाना से जानते हैं कुछ प्रचलित सूखे मेवों और उनके प्रयोग के सही तरीकों के बारे में…

बादाम

सूखे मेवों में सबसे प्रमुख है और इसे फाइटो-केमिकल पावरहाउस माना जाता है। इसमें प्रचुर मात्रा में कैल्शियम और प्रोटीन पाया जाता है, साथ ही इनमें फास्फोरस, जिंक और मैग्नीशियम जैसे तत्वों की भी मौजूदगी होती है। विटामिन-ई होने के कारण बादाम त्वचा की सेहत के लिए काफी उपयोगी है। इससे एंटी एजिंग एजेंट माना जाता है, यानी बुढ़ापे की गति को यह धीमा कर देता है।

प्राचीन आयुर्वेद ग्रंथों में बादाम को उष्ण, चिकना और भारी प्रभाव वाला बताया गया है। यह कफ और पित्त को बढ़ाता है और वात को कम करता है, इसे सामान्य टानिक में सर्वोत्तम माना गया है। बादाम का तेल भी औषधीय गुणों से भरपूर होता है, यह स्वास्थ्य सुधार करने के साथ मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र को पोषण देता है। वृद्ध लोगों के लिए यह काफी उपयोगी है। कभी-कभी गुनगुने दूध के साथ आधा चम्मच बादाम तेल लेने से एंटी आक्सीडेंट्स का लाभ मिलता है साथ ही आंतों के लिए यह स्नेहक का काम करता है, जिससे पुरानी कब्ज में काफी लाभ मिलता है।

अखरोट

प्राचीन ग्रीक और फारसियों द्वारा अखरोट का प्रयोग तेल और मिठाइयों को गाढ़ा करने के लिए किया जाता था। संस्कृत में इसे ‘अक्षोत’ और सामान्यत: अखरोट कहा जाता है। यह गर्म प्रभाव वाला सूखा मेवा है। यह अच्छा ब्रेन टानिक माना जाता है। इसके कठोर खोल में कसैले गुण होते हैं और लोक चिकित्सा में इसकी राख का प्रयोग दांतों के पाउडर या ‘मंजन’ बनाने में किया जाता है।

इसमें प्रचुर मात्रा में विटामिन, मिनरल, प्रोटीन और एंटीआक्सीडेंट्स के साथ साथ ओमेगा-3 फैटी एसिड पाया जाता है। यह रक्त संचार को सुधारने, नसों और प्रतिरक्षा को मजबूत बनाने में सहायक है। हालांकि, गर्मी के महीनों में इसके अत्यधिक प्रयोग से त्वचा पर दानें और मुंह में छाले पड़ सकते हैं। इससे बचने का बेहतर तरीका यही है कि प्रयोग करने से पहले अखरोट को रात भर पानी भिगो कर रखें।

खजूर

यह लोकप्रिय सूखा मेवा है। यह अधिकांशत: मध्य एशियाई देशों में मुख्य भोजन की तरह प्रयोग होता है। प्राचीन आयुर्वेदिक साहित्य में इसे ‘खर्जूर’ कहा गया है। यह आवश्यक विटामिन और खनिजों का समृद्ध स्रोत है। प्राकृतिक शर्करा की प्रचुरता के कारण यह तात्कालिक ऊर्जा प्रदान करता है। दुर्बलता की बीमारियों और लंबे उपवास के बाद इसका प्रयोग गुणकारी होता है। खजूर हाइपरएसिडिटी, कब्ज, एनीमिया, पुरानी खांसी और तंत्रिका विकारों के उपचार में काफी सहायक है।

काजू

हल्का मीठा और कैलोरी में समृद्ध काजू मूलत: ब्राजील के वर्षावनों में पाया जाता है। इसे पुर्तगालियों द्वारा दुनिया के विभिन्न भागों में पहुंचाया गया। काजू में घुलनशील आहार फाइबर की भरपूर मात्रा होती है। इसमें कैल्शियम, विटामिन बी की अच्छी मात्रा के साथ मोनोअनसैचुरेटेड फैट भी पाया जाता है। गर्म प्रभाव के कारण इसका सेवन बहुत संयम में करना चाहिए।

किशमिश

उच्च गुणवत्ता वाले काले और हरे अंगूरों को सुखाकर तैयार होने वाली किशमिश एक स्वास्थ्यप्रद सूखा मेवा है। इसे सामान्य बोलचाल की भाषा में ‘द्राक्षा’ या ‘दाख’ कहा जाता है। यह छोटा सूखा मेवा कई विटामिन, अमीनो एसिड और खनिजों से भरपूर होता है, जो शरीर में अन्य पोषक तत्वों के अवशोषण में मदद करता है। इसका प्रभाव ठंडा होता है, इसे बुखार, कब्ज, हाइपर एसिडिटी और रजोनिवृत्ति सिंड्रोम के उपचार में चिकित्सकीय रूप से दिया जाता है।

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