महोबा। सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कालेज में पंडित मदन मोहन मालवीय और पूर्व प्रधानमंत्री अटलबिहारी बाजपेयी की जयंती से पूर्व एक कार्यक्रम का आयोजन कर महान विभूतियों का जन्मदिन हषोल्लास के साथ मनाया। कार्यक्रम की शुरूआत विद्यालय के आचार्यों ने दोनो महापुरूषों के चित्र पर पुष्प अर्पित कर की और इसके बाद छात्रों ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। कार्यक्रम दौरान वक्ताओं ने मदन मोहन मालवीय व पूर्व प्रधानमंत्री के जीवन पर प्रकाश डाला और उनके सिद्धांतों के तहत जीवन में आगे बढ़ने की बच्चों को प्रेरणा।
संगीतार्चा जगप्रसाद तिवारी ने अपने संबोधन में कहा कि पंडित मदन मोहन मावनीय कई संस्थाओं के संस्थापक तथा कई पत्रिकाओं के सम्पादक रहे। इस रूप में वे हिन्दू आदर्शों, सनातन धर्म तथा संस्कारों के पालन द्वारा राष्ट्र निर्माण की पहल की थी। कहा कि मालवीय जी ने स्वतंत्रता आंदोलन में बहुत बड़ी भूमिका निभाई थी और हिन्दू विश्वविद्यालय की स्थापना करके उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में देश को बहुत बड़ा अंतार्राष्ट्रीय स्तर का एक संस्थान दिया। मदन मोहन मालवीय एक महान भारतीय शिक्षाविद्, स्वतंत्रता सेनानी और समाज सुधारक थे, जिन्हें ’महामना’ की उपाधि से सम्मानित किया गया था। कहा कि दोनो महापुरुषों का एक ही दिन 25 दिवसम्बर को जन्म हुआ था। उन्होंने कहा कि दोनो ही महान विभूतियों ने देश की उन्नति में विशेष योगदान दिया है, जिसे भुलाया नहीं जा सकता है।
कार्यक्रम में आचार्य जयनारायण तिवारी ने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी एक भारतीय राजनेता, कवि और पत्रकार थे, जिन्होंने तीन बार भारत के प्रधानमंत्री के रूप में कार्य किया और एक दूरदर्शी नेता के रूप में देश को मजबूती प्रदान की। कहा कि उनके बहुआयामी जीवन में जनसंघ से भाजपा तक का सफर, भारत को परमाणु शक्ति संपन्न बनाना सहित तमाम कार्य शामिल हैं, जिन्हें उनके जन्मदिन को ’सुशासन दिवस’ के रूप में मनाते हुए याद किया जाता है। कहा कि अटल जी के जीवन की प्रेरणा हमें हमेशा आगे बढ़ने में सहायता करती है। उन्होंने भारतीय राजनीति में एक नई सोच और दिशा प्रदान की, जो सदैव हमारे मार्गदर्शन का स्रोत रहेगी। इस मौके पर कृष्णचंद्र पाठक, राजाबाबू तिवारी ने भी अपने विचार व्यक्त किए।





