Wednesday, March 4, 2026
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1108 कुंडिय मृत्युंजय मां महायज्ञ में उमड़ा हवनार्थी श्रद्धालुओं का मेला

इटावा। रामलीला मैदान के पास में स्थित हिन्दू हॉस्टल के विशाल प्रांगण में हो रहे मृत्युंजय मां पीतांबरा महायज्ञ में भक्त यजमानों का मेला उमड़ रहा है।षष्ठम दिवस गुरुवार को प्रातः,दोपहर और रात्रि कालीन तीनों पालियों में हवन करने के लिए श्रद्धालुओं में कुंडों पर बैठने की होड़ लगी रही।गुरुवार को सुबह 8 बजे आरंभ हुई स्वाहा की पवित्र ध्वनियाँ रात्रि 12 बजे तक आकाश में गूंजती रहीं।घृत की आहुति से अग्नि ज्वालाएँ दिव्यता का स्वरूप बनकर उठीं और सम्पूर्ण परिसर को अदृश्य तेजस्विता से आलोकित कर गईं।यह केवल यज्ञ नहीं बल्कि सृष्टि और चेतना का पुनर्संयोजन है।

माँ पीतांबरा की आराधना के माध्यम से यह महायज्ञ,मृत्युंजय तत्त्व की उस रहस्यमयी शक्ति को जाग्रत करता है जो भय,रोग,दुर्भाग्य और मृत्यु जैसी सीमाओं को लाँघ कर जीवन को अमृतत्व की ओर अग्रसर करती है।देववाणी में कहा गया है यज्ञो वै श्रेष्ठतमं कर्म यज्ञ ही सर्वोत्तम कर्म है,क्योंकि यहीं से धर्म की जड़ें,आत्मा की शुद्धि और लोककल्याण की धारा प्रवाहित होती है।मृत्युंजय माँ पीतांबरा महायज्ञ का प्रत्येक कुंड,ब्रह्मांड के एक तत्व का प्रतिनिधि है।यह यज्ञ,न केवल व्यक्तिगत कल्याण का मार्ग है,बल्कि समष्टि के शुद्धिकरण का माध्यम भी है साथ ही यज्ञ धन की शुद्धि का भी सबसे उपयुक्त साधन हमारे वेदों में बताया गया है।

इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को अपनी आय का दशांश यज्ञ में समर्पित करना चाहिए।पूज्य गुरुजी श्री रामदासजी महाराज का आह्वान है कि जो व्यक्ति धर्म के इस यज्ञाग्नि में आहुति देता है,वह अपने भीतर और बाहर दोनों में शुद्धि का अनुभव करता है।अतःप्रत्येक सनातनी को इस दिव्य अनुष्ठान में सम्मिलित होकर माँ पीतांबरा के चरणों में अपनी श्रद्धा समर्पित करनी चाहिए।इस महायज्ञ में भाग लेने हेतु किसी प्रकार का शुल्क या दक्षिणा निर्धारित नहीं है।हवन सामग्री यज्ञशाला में उपलब्ध कराई जाती है।श्रद्धालु बस सनातनी परिधान (पुरुष-धोती कुर्ता,महिलाएँ-साड़ी या भारतीय वस्त्र) में उपस्थित होकर आहुति दें और अपनी श्रद्धा से दान करें।

पूर्णाहुति 16 नवम्बर

भंडारा 17 नवम्बर

यह आयोजन केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं,बल्कि एक आत्मिक पुनर्जागरण है जहाँ अग्नि देव स्वयं जीवन की दिशा को आलोकित करते हैं और माँ पीतांबरा की कृपा से समस्त नगर धर्ममय बन जाता है।यज्ञ व्यवस्था बनाने में नीरज तिवारी,जनमेजय सिंह भदौरिया,पंकज तिवारी बबलू,कुलदीप अवस्थी,अजय दीक्षित,अल्लू ठाकुर,पूनम पाण्डेय,नमिता तिवारी,प्रीती दुबे,धर्मेंद्र मिश्रा,अमित दीक्षित,मनोज पांडे,कुक्कू राजौरिया,अनिकेत श्रीवास्तव का सहयोग रहा।

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