Sunday, March 1, 2026
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ईश्वर का स्मरण होना ही जीवन दर्शन: मिथिलेश नन्दिनी शरण

ईश्वर का स्मरण् होना ही जीवन दर्शन: मिथिलेश नन्दिनीशरण
कानपुर महानगर।  बाबा जागेश्वर धाम नवाब गंज मे ‘‘पुरूषोत्तम मास’’ के अवसर पर विश्व कल्याण की कामना के साथ 20 मई से 30  मई 2018  तक चलने वाले श्रीमद भगवतकथा कथा सप्ताह के द्वितीय दिन आज प्रातः 9 बजे से 3 बजे तक वैदिक मत्रांेउच्चार के साथ श्रीघाम अयोघ्या से पघारे संत श्री मिथिलेश नन्दिनीशरण जी महाराज व चित्रकूट से परीक्षित के रूप मे पधारे आचार्य श्री नवलेश जी व 51 आचार्यों द्वारा भगवत कथा का मूल पाठ तथा अनुष्ठान श्री महाराज जी की अमृतवाणी के साथ ख्योरा नवाब गंज स्थित ‘‘जागेश्वर घाम मंदिर प्रांगण’’ में संपन्न हुआ ।

तद्उपरान्त सायंकाल 3बजे से 7बजे तक भगवतकथा का वाचन में श्री मिथिलेश नन्दिनीशरण जी महाराज ने कहा कि 12 स्कन्द, 335 अध्याय, 18हजार श्लोको से सजा हुआ पुराण-श्रीमद्भागवत महापुराण के नाम से जाना गया । तथा इस महापुराण से भगवान के 24 अवतारांे की कथा सुनने व सुनाने से व्यक्ति के परिवार में सदैव समांजस्य बना रहता है उक्त उदगार व्यक्त करते हुये संत श्री ने कहा कि भागवत की शुरूआत भक्तों के चरित्र से प्रारंम्भ होती है परन्तु आज प्रायःसमाज के लिए पाण्डवों का चरित्र आदर्श है क्योकि ‘‘विपत्ती-विकाश के लिऐ आवश्यक है’’ कहने का अभिप्राय है कि जिस भी दिन भगवान का ‘’सुमिरन न हो वह दिन विपत्ती’ का और ‘नित्य भगवान का स्मरण मानव मात्र के लिऐ संम्पत्ति’ प्रदाता है।पितामह भीष्म का दर्शन जहाॅ ब्रम्हर्चय का प्रतीक है। वहीं शुकदेव का आगमन और राजा परिक्षित का प्रश्न है कि मरने वाले व्यकित को क्या करना चाहिए? तथा भागवत का भी यही प्रश्न है तब उत्तर देते हुए शुकदेव जी ने कहा कि मृत्यु के समय ईश्वर का स्मरण् का होना यही जीवन का दर्शन है। उसी प्रकार भागवत भी जीवन दर्शन है।

संत श्री मिथिलेश नंदनी जी ने कहा की भागवत का एक शब्द भी सुनने मात्र से पूर्ण भगवत सुनने का फल मिलता है ,श्री मद भागवत की महिमा साधन से बढ़कर साध्य है जीवन में जितना भी शेष बचा है हमें सत्कर्मों के साथ भागवत को सुनना चाहिए भगवन श्री कृष्ण ने जब द्वापर के अंत में अपने धाम को जाने की तैयारी की तव उद्धव जी ने उन्हें न जाने का आघ्रह करते हुए कहा की प्रभु यदि आप चले जाओगे तो कलयुग आकर मनुष्यों का ग्रास कर लेगा | तब श्री कृष्ण ने उद्धव को कहा की मेरे जाने के बाद भी मै मनुष्यों के कल्याण के लिए श्री मद भागवत में वास करूँगा और जो भी मनुष्य श्री मद भागवत का अनुशरण , सुमिरन करेगा कलयुग उसपर कभी हावी नहीं होगा |

उक्त कार्यक्रम मे प्रमुख रूप से ब्रम्हाण्डोत्सव वैदिक विज्ञान मंडल के संरक्षक व कार्यक्रम के संयोजक आचार्य श्री उमेश दत्त शुक्ल जी व आचार्य श्री कुमार गौरव शुक्ल ,,योगेश भसीन, प्राण श्रीवास्तव दीपक तिवारी, कौस्तुभ शुक्ल ,विजय सिह ,कमल मिश्र आदि लोग मौजूद रहे

https://www.youtube.com/watch?v=EDLtmFX4w9o

सर्वोत्तम तिवारी की रिपोर्ट


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