Saturday, March 14, 2026
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120 करोड़ में से मात्र 20 करोड़ ही खर्च कर पायी स्मार्ट सिटी

Smart city could spend only 20 crores out of 120 crores

अवधनामा संवाददाता

कंपनी सीईओ ज्ञानेंद्र सिंह ने लेखा जोखा बताते हुए योजनाओं को जल्द पूरा कराने की कही बात

सहारनपुर (Saharanpur)। स्मार्ट सिटी के सीईओ व नगरायुक्त ज्ञानेंद्र सिंह ने कहा है कि स्मार्ट सिटी की जिन करीब एक दर्जन योजनाओं पर कार्य चल रहा है उन्हें जल्द ही पूरा कराया जायेगा। उन्होंने बताया कि स्मार्ट सिटी को केंद्र व राज्य सरकार से अब तक 119.50 करोड़ रुपया प्राप्त हुआ है जिसमें से मात्र 20.61 करोड़ रुपया खर्च हुआ और 98.89 करोड़ रुपया स्मार्ट सिटी के खाते में बकाया है।

स्मार्ट सिटी के सीईओ व नगरायुक्त ज्ञानेंद्र सिंह ने स्मार्ट सिटी की योजनाओं और उन पर हुए खर्च संबंधी सवालों का जवाब देते हुए बताया कि कोरोना व कुछ अन्य कारणों से स्मार्ट सिटी की योजनाएं पिछड़ गयी है लेकिन अब कार्यो में तेजी लायी जायेगी और जिन योजनाओं पर कार्य चल रहा है उन्हें जल्दी पूरा कराया जायेगा, चूंकि स्मार्ट सिटी के पास धन की कोई कमी नहीं है। उन्होंने बताया कि प्रथम चरण में स्मार्ट सिटी के तहत 23 किमी स्मार्ट रोड़ बनायी जायेगी। इनमें से घंटाघर से कचहरी पुल तक स्मार्ट रोड निर्माण का कार्य शुरु कर दिया गया है। इसके अलावा स्मार्ट सिटी के तहत सोलिड वेस्ट मैनेजमेंट के लिए 03.13 करोड़ रुपये कीमत के वाहन व अन्य उपकरण खरीदे जा चुके है, उस दिशा में भी काम तेजी से किया जा रहा है।

एक सवाल के जवाब में उन्होंने बताया कि स्मार्ट सिटी योजनाओं के लिए केंद्र व राज्य सरकार से 50-50 करोड़ रुपये की राशि के रुप में कुल एक सौ करोड़ रुपये स्मार्ट सिटी को मिले है। जिनमें से चालू करीब एक दर्जन परियोजनाओं पर अभी तक मात्र 11.63 करोड़ रुपये खर्च हुआ है और 88.37 करोड़ रुपया स्मार्ट सिटी के खाते में जमा है। इसके अलावा आॅफिस संबंधी खर्च के लिए दस करोड़ रुपया केंद्र सरकार से और साढ़े नौ करोड़ रुपया राज्य सरकार से यानि कुल साढ़े उन्नीस करोड़ रुपया प्राप्त हुआ है, जिसमें से 08.98 करोड़ रुपया अभी तक व्यय हुआ है और 10.52 करोड़ रुपया अभी स्मार्ट सिटी के खाते में जमा है। उन्होंने बताया कि जो 08.98 करोड़ रुपया व्यय हुआ है उसमें स्मार्ट सिटी की कंसलटेंसी कंपनी को किया गया 06.87 करोड़ का भुगतान भी शामिल है।

सीईओ ज्ञानेंद्र सिंह ने बताया कि स्मार्ट सिटी का हिसाब किताब पूर्णतः पारदर्शी रहता है। उसका आॅडिट भारत सरकार के महालेखा परीक्षक यानि कैग (कंट्रोलर आॅडिटर जनरल) द्वारा किया जाता है। वित्तीय वर्ष 2019-2020 तक का आॅडिट कैग द्वारा किया जा चुका है। उन्होंने यह भी बताया कि स्मार्ट सिटी के तहत जो भी खरीब हुयी है लगभग वह सभी सामान सरकारी पेार्टल, जैम पोर्टल के माध्यम से खरीदा गया है। उन्होंने बताया कि हमारी कोशिश ये रही है कि स्मार्ट सिटी का एक पैसा भी व्यर्थ खर्च न किया जाए। सभी शहरों में स्मार्ट सिटी के कार्यालय लाखों रुपया  महीना किराये वाले भवनों में चल रहे है लेकिन सहारनपुर स्मार्ट सिटी का कार्यालय निगम परिसर में ही बनाकर कम से कम दो लाख रुपया महीना बचाया गया है।

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