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इलाहाबाद। यूपी में कानून व्यवस्था को धता बताते हुए कुछ हमलावरों ने बसपा के एक नेता राजेश यादव की हत्या कर दी। घटना इलाहाबाद विश्वविद्यालय के ताराचंद हास्टल में हुई है। हमले के वक्त मृतक नेता अपने किसी मित्र और शहर के एक नर्सिंग होम के मालिक डॉक्टर मुकुल के साथ किसी से मिलने हॉस्टल में गए थे। उनकी हत्या की सूचना मिलते ही समर्थक घर पर एकत्र हो गए। समर्थकों ने इंडियन प्रेस चौराहे पर जमकर हंगामा किया।

घटना के अलावा आज चार दिन के अवकाश के बाद सरकारी कार्यालय और स्कूल भी खुले हैं और इस कारण चौराहे पर हंगामा होने लगा जिसके बाद जाम लग गया। राजेश यादव के समर्थक तोडफोड़ भी करने लगे और रोडवेज की एक बस को आग के हवाले कर दिया। इलाहाबाद में इस हत्या के बाद माहौल काफी तनावपूर्ण बन गया है। समर्थकों ने पुलिस पर पथराव किया।
राजेश यादव अपने मित्र डॉक्टर मुकुल सिंह के साथ फार्चुनर से ताराचंद हॉस्टल गए थे। भदोही के दुगुना गांव निवासी राजेश यादव 2017 में ज्ञानपुर विधानसभा क्षेत्र से चुनाव भी लड़े थे। वर्तमान में बसपा ज्ञानपुर विधानसभा क्षेत्र के प्रभारी भी थे। राजेश यादव कम्पनीबाग के पीछे हरितकुंज अपार्टमेंट में रहते थे। कल देर रात राज नर्सिंग होम के मालिक डॉक्टर मुकुल के साथ ताराचंद हॉस्टल में किसी से मिलने गए थे। बसपा नेता राजेश यादव इंजीनियर भी थे।
रात में करीब तीन बजे किसी से हॉस्टल के बाहर विवाद हो गया। इसी दौरान उन पर हमला कर दिया गया। राजेश के पेट में गोली लगी और वह गंभीर रुप से जख्मी हो गए।
डॉक्टर मुकुल उन्हें जख्मी हालत में राज नर्सिंग होम ले गए जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। एसपी सिटी सिद्धार्थ शंकर मीणा ने बताया कि बसपा नेता की गाड़ी में भी कुछ खोखे मिले हैं। गाड़ी में पीछे से ईंट पत्थर भी मारे गए। फिलहाल कर्नलगंज पुलिस ने डेडबॉडी को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है।
भदोही जिले के रहने वाले राजेश यादव अपनी पत्नी मोनिका यादव और चार बच्चों के साथ इलाहाबाद में रहते थे। राजेश यादव पेश से इंजीनियर थे। इससे पहले वो दुबई, मॉरिशस में नौकरी कर चुके थे।
पुलिस की लापरवाही के चलते सैंकड़ों की तादद में मौजूद बसपा कार्यकर्ताओं ने यूपी रोडवेज की बस में तोड़फोड़ करते हुए बस को आग के हवाले कर दिया। आक्रोशित लोगों ने पुलिस पर भी पथराव किया। पथराव में दर्जनों लोग घायल हुए हैं। घायलों पुलिसकर्मी और मीडियाकर्मी भी शामिल हैं। पुलिस की लापरवाही का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि हत्या के 8 घंटे बाद भी जिले के कप्तान मौके पर झांकने तक नहीं पहुंचे।






