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वैसे तो नवरात्र के नौ दिन मां दुर्गा के नौ रूपों की आराधना की जाती है. लेकिन उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड में इन दिनों एक राक्षस की पूजा होती है. चौंकिए मत ये सच है. नवरात्र के नौ दिन बुंदेलखंड में कुंवारी लड़कियां सुआटा नाम के एक राक्षस की पूजा करती हैं.

दरअसल इस रक्षक का उल्लेख महाभारत में भी मिलता है, जिसका वध श्रीकृष्ण ने किया था. पौराणिक कथाओं के मुताबिक सुआटा नाम का राक्षस कुंवारी लडकियो को उठा ले जाता था और उन्हें अपना निवाला बनता था. जिसके बाद कुंवारी कन्याओं ने सुआटा से बचने के लिए उसकी पूजा शुरू कर दी. जिससे प्रसन्न होकर रक्षक ने उनकी रक्षा का वचन दिया.
तब से लेकर आज तक कुंवारी कन्याएं सुआटा की पूजा करती हैं. यह पूजा शादीशुदा महिलाओं के लिए वर्जित है. सुआटा पूजा को यहां सुआटा खेलना भी कहते हैं. यह सिलसिला परंपरा यहां सदियों से चली आ रही है.
बुंदेलखंड के वासिंदे बताते हैं की नौरात्र में यह पूजा हर गांव और शहर में होती है. कथाओं के मुताबिक सुआटा नाम का राक्षस जब भी कोई नई नवेली दुल्हन विदा होती थि तो राक्षस उसे अगवा कर ले जाता था. जब इस राक्षस का अत्याचार बढ़ गया तो ऋषि-मुनियों ने कहा कि नवरात्र पवित्र नौ दिनों तक सुआटा राक्षस की रोज पूजा अर्चना करने से वह शांत हो जाएगा.तब से लेकर आज तक कुवांरी लडकियां एक साथ इक्कठा होकर एक दीवार पर गोबर से सुआटा राक्षस की आकृति बनाती हैं, फिर उसे रंगों से सजाती हैं. रोज सुबह सूरज निकलने से पहले ये कुवांरी लडकियां नौ दिनों तक इस सुआटा नाम के राक्षस की पूजा और आरती करती हैं. इस दौरान रंगोलियां बनाकर और गीत गाकर इस राक्षस को प्रसन्न करती हैं.
कहा जाता है कि सुआटा की पूजा से उनकी और उनके होने वाले जीवन साथी की रक्षा होती है. लगातार नौ दिन तक चलने वाली इस पूजा के बाद सुआटा का अन्तिम संस्कार करके तेरहवीं भी की जाती है.
कुंवारी लड़कियों के मुताबिक नौ दिनों तक राक्षस की पूजा करने से उन्हें आत्मबल मिलता है. फिर शादी के बाद भी एक बार और पूजा की जाती है. उसके बाद राक्षस की पूजा नहीं की जाती.
बुंदेलखंड के इतिहासकार बताते हैं कि महाभारत काल के समय एक नरकासुर नामक दानव था जो कुवांरी लडकियो को कैद करके अपने पास रखता था. उससे बचने के लिए इसकी पूजा होने लगी. आज भी कुवांरी लडकियां सुआटा नामक राक्षस का खेल खेलकर नौ दिनों तक पूजा आराधना करती हैं और अपने और अपने गांव की सलामती के लिए वर मांगती हैं.
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