Thursday, March 5, 2026
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देश को आगे ले जाने के लिये कृषि को आगे ले जाने की जरूरत है, ठीक उसी प्रकार उत्तर प्रदेश बढे़गा तो देश बढ़ेगा

BRIJENDRA BAHADUR MAURYA—
कृषि उत्पादन में अधिक लाभ के लिये गुणवत्ता जरूरी : राम नाईक

लखनऊ । उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद लखनऊ के 28वें स्थापना दिवस के अवसर पर बुधवार को राष्ट्रीय संगोष्ठी ‘एग्रीकल्चर रिसर्च एण्ड एजुकेशन इन रिलेशन टू डेवलेपमेंट आॅफ इंटीग्रेटेड एग्रीकल्चर चैलेंज एण्ड सोल्यूशन’ का आयोजन किया गया। संगोष्ठी का आयोजन उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान एवं उत्तर प्रदेश कृषि विज्ञान अकादमी के संयुक्त तत्वावधान में किया गया था। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक थे तथा अध्यक्षता प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही द्वारा की गयी। संगोष्ठी में कृषि उत्पादन आयुक्त चन्द्र प्रकाश, प्रो0 आर0बी0 सिंह, प्रो0 पंजाब सिंह, डाॅ0 मंगला प्रसाद सहित अन्य कृषि वैज्ञानिक एवं विशेषज्ञ उपस्थित रहे ।
राज्यपाल ने संगोष्ठी का उद्घाटन करते हुये कहा कि ‘मेरे पास न तो गाँव में कृषि योग्य भूमि है और न ही कृषि की कोई पृष्ठभूमि रही है। मैं वाणिज्य का छात्र रहा हूँ। अपनी बात ग्राहक की भूमिका में रख सकता हूँ। कृषक को उत्पाद से मुनाफा हो और देश के लिये आवश्यक है कि जनता को भरपेट भोजन मिले।’ संगोष्ठी से विचार के साथ-साथ आचार में भी परिवर्तन आना चाहिये। कृषि क्षेत्र में प्रयासों को गति देने के लिये अनुसंधान प्रयोगशालाओं तक सीमित न रहे। हमारे अनुसंधान किसानों के खेत तक पहुँचें, इस पर विचार करने की जरूरत है।
नाईक ने कहा कि कृषि में अपेक्षित सुधार के लिये वैज्ञानिक विज्ञान के दृष्टिकोण से और राजनेता राजनैतिक दृष्टिकोण से आगे बढ़ाने का प्रयास करें। कृषि उत्पादन में अधिक लाभ के लिये गुणवत्ता जरूरी है। दूसरे प्रदेशों से विचारों के आदान-प्रदान के माध्यम से खेती की पद्धति में नये परिवर्तन किये जा सकते हैं। सरकारी योजनाओं का निरंतर अनुश्रवण होना चाहिये ताकि यह जाना जा सके कि किसानों को अपेक्षित लाभ हो रहा है अथवा नहीं। इसके लिये किसानों से भी संवाद कर उनके सुझाव प्राप्त करने चाहिये। उन्होंने कहा कि राजनैतिक इच्छाशक्ति और वैज्ञानिक इच्छाशक्ति के आधार पर देश का विकास तेजी हो सकता है।
राज्यपाल ने कहा कि उत्तर प्रदेश महत्वपूर्ण प्रदेश है। देश को आगे ले जाने के लिये कृषि को आगे ले जाने की जरूरत है, ठीक उसी प्रकार उत्तर प्रदेश बढे़गा तो देश बढ़ेगा। हमारे किसानों के पास कृषि कौशल है इसलिये उन्हें अशिक्षित नहीं कहा जा सकता। 60 के दशक में हम गेहूँ विदेशों से आयात करते थे। आजादी के बाद देश की आबादी तीन गुना से ज्यादा बढ़ी है पर हम खाद्यान्न के मामले में आत्मनिर्भर हुये हैं जबकि खेती योग्य जमीन घटी है। पूर्व प्रधानमंत्री स्व0 लालबहादुर शास्त्री ने सप्ताह में एक दिन उपवास की बात करते हुये ‘जय जवान-जय किसान’ का नारा दिया और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने उसमें जय विज्ञान जोड़कर प्रेरणा देने का काम किया है। उन्होंने कहा कि यह परिवर्तन देश के वैज्ञानिकों एवं किसानों के संयुक्त प्रयास से हुआ है।
कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि कृषि देश की आर्थिक रीढ़ है। उत्तर प्रदेश में इस वर्ष कृषि उत्पादन 550 लाख मीट्रिक टन होने की संभावना है। क्षेत्रफल एवं उत्पाद के अनुसार उत्तर प्रदेश का कृषि उत्पादन पंजाब और हरियाणा से पीछे है। किसानों को वैज्ञानिक ढंग से खेती करने के लिये प्रेरित करने की जरूरत है। किसान जैविक खेती के साथ-साथ फसलों की अच्छी प्रजातियाँ चयनित करें, जो निर्यात योग्य हों और अधिक लाभ दे सकें। पारम्परिक खेती के साथ-साथ कृषि आधारित अन्य विकल्पों पर भी ध्यान दें। उन्होंने कहा कि किसानों को अद्यतन शोध की जानकारी मिले तथा वैज्ञानिक खेती का व्यापक प्रचार-प्रसार एवं प्रदर्शन होना चाहिये।
कार्यक्रम में कृषि उत्पादन आयुक्त  चन्द प्रकाश, प्रो0 आर0बी0 सिंह सहित अन्य लोगों ने भी अपने विचार रखे। राज्यपाल ने इस अवसर पर डाॅ0 सी0आर0 भाटिया, डाॅ0 गौरीशंकर, डाॅ0 के0एम0 पाठक, डाॅ0 मोहम्मद इम्तियाज, डाॅ0 सुशील सिंह, डाॅ0 उमा शाह, डाॅ0 हंसराज सहित अन्य कृषि विशेषज्ञों एवं वैज्ञानिकों को स्मृति चिन्ह व सम्मान पत्र देकर सम्मानित भी किया तथा परिषद की स्मारिका सहित अन्य प्रकाशनों का भी विमोचन किया ।

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