पैरों में बार-बार ठंडापन होना न करें नजर अंदाज

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नई दिल्ली। सर्दियों में पैरों का ठंडा रहना आम बात हो सकती है, लेकिन अगर मौसम सामान्य होने के बावजूद आपके पैर अक्सर ठंडे रहते हैं, तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। कई बार शरीर का यह संकेत किसी अंदरूनी स्वास्थ्य समस्या की ओर इशारा करता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, पैरों में लगातार ठंडापन महसूस होना रक्त संचार में गड़बड़ी से लेकर थायरॉइड और अन्य बीमारियों का लक्षण हो सकता है।

रक्त संचार में कमी हो सकती है वजह

पैरों के ठंडे रहने का एक प्रमुख कारण शरीर में रक्त का सही तरीके से प्रवाह न होना है। जब पैरों तक पर्याप्त मात्रा में खून नहीं पहुंचता, तो उनमें ठंडापन महसूस हो सकता है। खासकर परिधीय धमनी रोग (Peripheral Artery Disease) में पैरों की धमनियां संकरी हो जाती हैं, जिससे रक्त प्रवाह प्रभावित होता है। ऐसी स्थिति में चलते समय पैरों में दर्द, सुन्नपन और कमजोरी भी महसूस हो सकती है।

थायरॉइड की समस्या भी हो सकती है कारण

थायरॉइड ग्रंथि शरीर के मेटाबॉलिज्म को नियंत्रित करती है। जब यह पर्याप्त हार्मोन नहीं बनाती, तो हाइपोथायरॉइडिज्म की समस्या हो सकती है। इसके कारण शरीर का तापमान नियंत्रित करने की क्षमता प्रभावित होती है और व्यक्ति को हाथ-पैरों में ठंडक महसूस हो सकती है। इसके साथ थकान, वजन बढ़ना, रूखी त्वचा और बाल झड़ने जैसे लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं।

खून की कमी से भी हो सकता है पैरों में ठंडापन

शरीर में आयरन या हीमोग्लोबिन की कमी होने पर एनीमिया की समस्या हो सकती है। हीमोग्लोबिन शरीर के विभिन्न हिस्सों तक ऑक्सीजन पहुंचाने का काम करता है। इसकी कमी से ठंड लगना, कमजोरी, चक्कर आना, सांस फूलना और थकान जैसी परेशानियां हो सकती हैं।

डायबिटीज के मरीज रहें सावधान

लंबे समय तक ब्लड शुगर का स्तर बढ़ा रहने से नसों को नुकसान पहुंच सकता है। इसे डायबिटिक न्यूरोपैथी कहा जाता है। इस स्थिति में पैरों में ठंडापन, जलन, झुनझुनी या सुन्नपन महसूस हो सकता है। कई बार मरीज को पैरों में चोट लगने का भी पता नहीं चलता, इसलिए नियमित रूप से पैरों की जांच करना जरूरी है।

रेनॉड्स सिंड्रोम भी हो सकता है एक कारण

रेनॉड्स सिंड्रोम में ठंड या तनाव के कारण हाथों और पैरों की छोटी रक्त वाहिकाएं अचानक सिकुड़ जाती हैं। इससे उंगलियों का रंग सफेद या नीला पड़ सकता है और उनमें ठंडापन तथा सुन्नपन महसूस हो सकता है। गर्माहट मिलने पर दोबारा रक्त प्रवाह सामान्य होने से रंग में बदलाव आ सकता है।

किन लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें?

अगर पैरों में ठंडापन लगातार बना रहता है और इसके साथ निम्न लक्षण दिखाई देते हैं, तो चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।

  • पैरों में लगातार दर्द या ऐंठन होना।
  • पैरों और उंगलियों का रंग सफेद, नीला या काला पड़ना।
  • पैरों में सुन्नपन या झुनझुनी महसूस होना।
  • चलते समय पिंडलियों में दर्द होना।
  • पैरों में घाव होना, जो लंबे समय तक ठीक न हो।
  • बिना वजह अत्यधिक थकान और कमजोरी महसूस होना।

डॉक्टर से कब मिलना जरूरी है?

अगर आपके पैर बार-बार ठंडे रहते हैं और गर्म वातावरण में भी सामान्य नहीं होते, तो डॉक्टर से जांच करवानी चाहिए। चिकित्सक जरूरत के अनुसार ब्लड टेस्ट, हीमोग्लोबिन, थायरॉइड, ब्लड शुगर और रक्त संचार से जुड़ी जांच कराने की सलाह दे सकते हैं।

यदि अचानक एक पैर बहुत ठंडा पड़ जाए और उसके साथ तेज दर्द, पीलापन या नीलापन, सुन्नपन अथवा कमजोरी हो, तो यह रक्त प्रवाह में गंभीर रुकावट का संकेत हो सकता है। ऐसी स्थिति में तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता लें।

क्या करें बचाव के लिए?

पैरों को गर्म रखें, नियमित रूप से टहलें, लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठने से बचें और संतुलित आहार लें। धूम्रपान से दूरी बनाएं तथा डायबिटीज और ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखें। बिना डॉक्टर की सलाह के किसी दवा या सप्लीमेंट का सेवन न करें।

 

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