लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजनीति में विधानसभा चुनाव 2027 से पहले समान नागरिक संहिता (UCC) का मुद्दा एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को लखनऊ में भाजपा की प्रदेश कार्यसमिति की बैठक को संबोधित करते हुए बड़ा ऐलान किया। उन्होंने कहा कि यदि उत्तर प्रदेश में भाजपा की सरकार दोबारा बनती है तो राज्य में समान नागरिक संहिता लागू की जाएगी। उनके इस बयान के बाद प्रदेश में यूसीसी को लेकर राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज हो गई है।
अमित शाह ने क्या किया ऐलान?
अमित शाह ने भाजपा कार्यसमिति की बैठक में पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि इस बार सरकार बनने पर उत्तर प्रदेश में यूसीसी लागू की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि देश के कई राज्यों में समान नागरिक संहिता लागू की जा चुकी है।
शाह का यह बयान 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच आया है। भाजपा इसे अपने आगामी चुनावी एजेंडे का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाने की दिशा में आगे बढ़ती दिखाई दे रही है।
क्या है समान नागरिक संहिता (UCC)?
समान नागरिक संहिता का मतलब है कि देश के सभी नागरिकों के लिए व्यक्तिगत और पारिवारिक मामलों में समान नागरिक कानून लागू हों, चाहे उनका धर्म या समुदाय कुछ भी हो।
इसके दायरे में मुख्य रूप से निम्नलिखित विषय आते हैं:
- शादी: विवाह की शर्तों और पंजीकरण से जुड़े नियम।
- तलाक: विवाह विच्छेद की प्रक्रिया और उससे जुड़े कानूनी प्रावधान।
- विरासत: संपत्ति और उत्तराधिकार के अधिकार।
- गोद लेना: बच्चों को गोद लेने से संबंधित नियम।
- अन्य पारिवारिक मामले: विभिन्न समुदायों के व्यक्तिगत कानूनों में एकरूपता लाने से जुड़े प्रावधान।
हालांकि उत्तर प्रदेश में यूसीसी का अंतिम मसौदा और उसके विस्तृत प्रावधान अभी घोषित नहीं किए गए हैं। इसलिए यह कहना जल्दबाजी होगी कि राज्य में लागू होने पर प्रत्येक नियम किस प्रकार बदलेगा।
उत्तराखंड बना देश का पहला राज्य
समान नागरिक संहिता लागू करने के मामले में उत्तराखंड देश का पहला राज्य बना। वहां जनवरी 2025 में यूसीसी लागू किया गया था। इसके बाद गुजरात और असम सहित अन्य राज्यों में भी इस दिशा में कदम उठाए गए हैं।
उत्तराखंड के कानून में विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप से संबंधित प्रावधान शामिल हैं। हालांकि उत्तर प्रदेश में लागू होने वाली संहिता का स्वरूप क्या होगा, यह उसके प्रस्तावित कानून और अंतिम प्रावधानों से ही स्पष्ट होगा।
यूसीसी पर क्यों छिड़ सकती है बहस?
यूसीसी को लेकर समर्थकों का तर्क है कि इससे सभी नागरिकों के लिए समान कानून की व्यवस्था बनेगी और व्यक्तिगत कानूनों में मौजूद असमानताओं को दूर करने में मदद मिल सकती है।
वहीं इसके आलोचक भारत की धार्मिक और सांस्कृतिक विविधता, अलग-अलग समुदायों की परंपराओं तथा व्यक्तिगत अधिकारों को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। उनका कहना है कि किसी भी समान कानून को लागू करते समय सभी समुदायों की चिंताओं और संवैधानिक अधिकारों का ध्यान रखना जरूरी है।
2027 के चुनाव में अहम मुद्दा बन सकता है UCC
अमित शाह के इस बयान से स्पष्ट है कि भाजपा उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले समान नागरिक संहिता को प्रमुख राजनीतिक मुद्दों में शामिल करने की तैयारी में है। अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि राज्य में यूसीसी को लेकर सरकार की ओर से कब मसौदा तैयार किया जाता है और इसमें किन-किन प्रावधानों को शामिल किया जाता है।
फिलहाल अमित शाह का ऐलान एक चुनावी वादा है, उत्तर प्रदेश में यूसीसी लागू होने की अधिसूचना नहीं। इसके लागू होने की स्थिति भाजपा की सत्ता में वापसी और उसके बाद कानून बनाने की प्रक्रिया पर निर्भर करेगी।


