HomeMarqueeस्टारलिंक विवाद पर केंद्र का दोटूक जवाब

स्टारलिंक विवाद पर केंद्र का दोटूक जवाब

नई दिल्ली। भारत में एलन मस्क की सैटेलाइट इंटरनेट सेवा स्टारलिंक की शुरुआत को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। स्टारलिंक के भारत में व्यावसायिक संचालन में हो रही देरी पर एलन मस्क ने सवाल उठाए और आरोप लगाया कि कुछ प्रभावशाली कारोबारी समूह अपने एकाधिकार को बचाने के लिए कंपनी के रास्ते में बाधा डाल रहे हैं। इन आरोपों पर केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने स्पष्ट जवाब देते हुए कहा कि भारत किसी भी क्षेत्र में एकाधिकार की अनुमति नहीं देता। सरकार का उद्देश्य उपभोक्ताओं को प्रतिस्पर्धा के बीच बेहतर सेवाओं का विकल्प उपलब्ध कराना है।

मस्क के आरोपों से शुरू हुआ विवाद

स्पेसएक्स के संस्थापक एलन मस्क ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर आरोप लगाया कि भारत में स्टारलिंक की शुरुआत को कुछ प्रभावशाली कारोबारी रोकने का प्रयास कर रहे हैं। मस्क के मुताबिक, इसका उद्देश्य भारतीय बाजार पर अपना दबदबा बनाए रखना है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जब स्टारलिंक दुनिया के 165 से अधिक देशों में सेवाएं देने के लिए अधिकृत है और कंपनी भारतीय नियमों का पालन करने की दिशा में वर्षों से काम कर रही है, तो भारत में व्यावसायिक सेवाएं शुरू करने की अनुमति मिलने में इतनी देरी क्यों हो रही है।

मस्क के इन बयानों के बाद भारतीय दूरसंचार क्षेत्र में नई बहस छिड़ गई। उनके आरोपों को देश के बड़े दूरसंचार कारोबारियों के बीच प्रतिस्पर्धा से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, मस्क ने शुरुआत में अपने आरोपों में किसी कारोबारी समूह का नाम नहीं लिया था।

सिंधिया ने कहा—तीन कंपनियों को मिला है लाइसेंस

केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मस्क के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि स्टारलिंक के साथ किसी तरह का भेदभाव नहीं किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि भारत में तीन कंपनियों को सैटेलाइट संचार सेवाओं के लिए लाइसेंस दिया गया है। इनमें एलन मस्क की स्टारलिंक, भारती समूह समर्थित वनवेब और जियो सैटेलाइट कम्युनिकेशंस शामिल हैं।

सिंधिया के अनुसार, लाइसेंस मिल जाने भर से किसी कंपनी को तत्काल व्यावसायिक सेवाएं शुरू करने की अनुमति नहीं मिल जाती। प्रत्येक कंपनी को निर्धारित सुरक्षा मानकों और अन्य नियामकीय शर्तों को पूरा करना होगा। इसके बाद स्पेक्ट्रम आवंटन और संबंधित प्रक्रियाओं के पूरा होने पर सेवाएं शुरू करने का रास्ता साफ होगा।

मंत्री ने जोर देकर कहा कि सरकार का लक्ष्य ऐसा प्रतिस्पर्धी बाजार तैयार करना है, जहां उपभोक्ताओं को बेहतर इंटरनेट सेवाएं मिल सकें और किसी एक कंपनी का दबदबा कायम न हो। <escape>

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