मुंबई। देश के सबसे बड़े निजी क्षेत्र के बैंकों में शामिल एचडीएफसी बैंक में नेतृत्व परिवर्तन होने जा रहा है। भारतीय रिजर्व बैंक की मंजूरी के बाद अनूप बागची को बैंक का नया प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी नियुक्त किया गया है। वह 27 अक्टूबर 2026 से तीन साल के कार्यकाल के लिए जिम्मेदारी संभालेंगे। बागची मौजूदा प्रमुख शशिधर जगदीशन की जगह लेंगे, जिनका कार्यकाल 26 अक्टूबर को समाप्त हो रहा है।
आईसीआईसीआई समूह से एचडीएफसी बैंक तक का सफर
अनूप बागची वित्तीय क्षेत्र का जाना-पहचाना नाम हैं। वह वर्ष 1992 से आईसीआईसीआई समूह से जुड़े रहे हैं और बैंकिंग, पूंजी बाजार, संपत्ति प्रबंधन तथा बीमा क्षेत्र में तीन दशक से अधिक का अनुभव रखते हैं। वह आईसीआईसीआई बैंक के कार्यकारी निदेशक और आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज के प्रबंध निदेशक एवं सीईओ भी रह चुके हैं। फिलहाल वह आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल लाइफ इंश्योरेंस के एमडी एवं सीईओ हैं।
एचडीएफसी बैंक के लिए क्यों अहम है यह बदलाव?
बागची की नियुक्ति ऐसे समय हुई है जब एचडीएफसी बैंक के सामने विलय के बाद कारोबार की रफ्तार, जमा वृद्धि, लाभप्रदता और निवेशकों का भरोसा मजबूत करने जैसी कई प्राथमिकताएं हैं। 2023 में एचडीएफसी लिमिटेड के साथ विलय के बाद बैंक के आकार और संचालन में बड़ा बदलाव आया है। ऐसे में नए नेतृत्व से रणनीति, संचालन और विकास की दिशा पर बाजार की नजर रहेगी।
पहली बार बाहरी व्यक्ति को मिली शीर्ष जिम्मेदारी
बागची की नियुक्ति की सबसे खास बात यह है कि वह एचडीएफसी बैंक के भीतर से आने वाले उम्मीदवार नहीं हैं। वह आईसीआईसीआई समूह से आए हैं, जो एचडीएफसी बैंक का प्रमुख निजी क्षेत्रीय प्रतिस्पर्धी रहा है। इसलिए उनकी नियुक्ति को बैंक के नेतृत्व में एक महत्वपूर्ण बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है।
क्या बागची बदल पाएंगे बैंक की तस्वीर?
बागची के सामने सबसे बड़ी चुनौती बैंक की मजबूत विरासत को बनाए रखते हुए विकास की नई गति तैयार करना होगी। जमा और कर्ज वृद्धि को संतुलित करना, डिजिटल सेवाओं को मजबूत करना, संचालन की दक्षता बढ़ाना और निवेशकों का भरोसा बनाए रखना उनके शुरुआती एजेंडे में अहम हो सकता है। हालिया कारोबारी अपडेट में बैंक ने कर्ज और जमा में मजबूत वृद्धि दर्ज की है, इसलिए नए नेतृत्व के सामने इस गति को टिकाऊ बनाने की चुनौती भी होगी।
अब नजर 27 अक्टूबर पर होगी, जब अनूप बागची औपचारिक रूप से एचडीएफसी बैंक की कमान संभालेंगे। उनके तीन साल के कार्यकाल में बैंक किस तरह अपनी विकास रणनीति को आगे बढ़ाता है और बाजार का भरोसा कितना मजबूत करता है, यही इस नेतृत्व परिवर्तन की सबसे बड़ी परीक्षा होगी।





