सदर तहसील में एक वर्ष से अधिक समय से लंबित हैं नामांतरण के कई मामले
गोरखपुर। उत्तर प्रदेश सरकार आम नागरिकों को राजस्व संबंधी सेवाएं समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से उपलब्ध कराने के लिए लगातार नियमों में सुधार कर रही है। नामांतरण की प्रक्रिया को भी सरल और निर्धारित समय-सीमा में पूरा करने के लिए स्पष्ट सरकारी गाइडलाइन जारी की गई है। लेकिन गोरखपुर सदर तहसील में इन निर्देशों का पालन होता दिखाई नहीं दे रहा है। यहां अनेक नामांतरण वाद महीनों नहीं, बल्कि एक वर्ष से भी अधिक समय से लंबित पड़े हैं, जिससे संबंधित पक्षों को लगातार परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
जानकारी के अनुसार सदर तहसील में नामांतरण से जुड़े कई मामले मार्च 2025 से लंबित हैं। इनमें प्रमुख वाद संख्या 1517, मोहम्मद उस्मान बनाम फिरोज आलम, वाद संख्या 1518, साकिब आलम बनाम खलिक आलम तथा वाद संख्या 1519, असमा तलत बनाम मोहम्मद अली तनवीर जो एक ही परिवार के हैं। इन तीनों मामलों में आज तक अंतिम निर्णय नहीं हो सका है, जबकि सरकारी गाइडलाइन के अनुसार ऐसे मामलों का समयबद्ध निस्तारण किया जाना चाहिए।
वादकारियों का कहना है कि वे लगातार तहसील के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन सुनवाई पूरी कर निर्णय नहीं किया जा रहा है। इससे उन्हें आर्थिक, मानसिक और प्रशासनिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। नामांतरण लंबित होने के कारण भूमि से संबंधित अन्य कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं।
प्रदेश सरकार ने राजस्व विभाग में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के उद्देश्य से समयबद्ध सेवा देने पर विशेष जोर दिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ स्वयं अधिकारियों को आम जनता की समस्याओं का त्वरित समाधान करने के निर्देश देते रहे हैं। इसके बावजूद मुख्यमंत्री के गृह जनपद गोरखपुर की सदर तहसील में ही सरकारी निर्देशों की अनदेखी किए जाने के आरोप प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि राजस्व मामलों का समय पर निस्तारण नहीं होगा तो सरकार की जनहितकारी योजनाओं और प्रशासनिक सुधारों का उद्देश्य अधूरा रह जाएगा। उनका आरोप है कि कई नामांतरण पत्रावलियां महीनों से फाइलों में धूल फांक रही हैं और जिम्मेदार अधिकारी-कर्मचारी समयबद्ध कार्रवाई के प्रति गंभीर नजर नहीं आते।
अब देखना यह होगा कि संबंधित अधिकारी इन लंबित मामलों का शीघ्र निस्तारण कर शासन की मंशा के अनुरूप आम जनता को राहत दिलाते हैं या फिर नामांतरण की फाइलें इसी तरह दफ्तरों में धूल फांकती रहेंगी।





