नगर निकाय की योजनाओं की बैठक में डीएम हुए नाराज
बलिया। जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह की अध्यक्षता में शनिवार को कलेक्ट्रेट सभागार में जिले के नगर निकायों में संचालित विभिन्न योजनाओं की प्रगति की समीक्षा बैठक हुई। बैठक में संबंधित विभागों के अधिकारियों को योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी लाने और लापरवाही पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी गई।
जिलाधिकारी ने जनपद के सभी नालों की समयबद्ध सफाई सुनिश्चित करने और इसकी जांच कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जहां एमआरएफ (मैटेरियल रिकवरी फैसिलिटी) सेंटर स्थापित हैं, उनका नियमित संचालन होना चाहिए। जांच में संचालन बंद मिलने पर संबंधित के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। यदि संचालन में कोई समस्या है, तो अधिकारियों को तत्काल अवगत कराने को कहा गया। निर्माणाधीन एमआरएफ सेंटरों को भी शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए गए।
सभी अधिशासी अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में कूड़ा उठान और उसके वैज्ञानिक निस्तारण की व्यवस्था सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए गए। डीएम ने स्पष्ट किया कि इसमें किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। साथ ही, साफ किए गए नालों की फोटो उपलब्ध कराने और टीम गठित कर उनकी जांच कराने के निर्देश भी दिए गए। मुख्यमंत्री नगर सृजन योजना की समीक्षा के दौरान जिलाधिकारी ने पाया कि ग्राम पंचायत नगरा में स्वीकृत 114 कार्यों में से केवल चार पूरे हुए हैं, जबकि 10 कार्य अभी लंबित हैं।
वहीं, नगर पंचायत रतसर कला में स्वीकृत 110 कार्यों की धीमी प्रगति पर उन्होंने कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने निर्देश दिया कि जहां कार्यों में अनावश्यक देरी हो रही है, वहां संबंधित ठेकेदारों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। सीवरेज एवं जल निकासी से जुड़े पूर्ण हो चुके कार्यों को तत्काल क्रियाशील बनाने के निर्देश भी दिए गए।
राज्य सेक्टर पेयजल व्यवस्था योजना की समीक्षा में भी जिलाधिकारी ने असंतोष व्यक्त किया। जनपद में स्वीकृत 53 कार्यों में से केवल 11 कार्य पूरे होने पर उन्होंने संबंधित अधिकारियों को फटकार लगाई।
नगर पंचायत बेल्थरारोड में स्वीकृत 116 कार्यों में से एक भी कार्य पूरा न होने पर अधिशासी अधिकारी से स्पष्टीकरण तलब किया गया। शहरी क्षेत्रों में अंत्येष्टि स्थल निर्माण योजना के तहत नगर पंचायत रतसर कला में धनराशि उपलब्ध होने के बावजूद कार्य शुरू न होने पर भी डीएम ने रतसर कला के ईओ से स्पष्टीकरण मांगा। इसके अलावा, वंदन योजना की समीक्षा के दौरान भी प्रगति संतोषजनक न मिलने पर अधिकारियों को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा गया कि वे स्वयं योजनाओं का निरीक्षण करेंगे।





