गोण्डा। प्रदेश सरकार भले ही विकास और बेहतर बुनियादी सुविधाओं के बड़े-बड़े दावे कर रही हो, लेकिन गोंडा शहर से सटे लक्ष्मनपुर हरिवंश की तस्वीर इन दावों की हकीकत बयां करती नजर आती है। शहर की सब्जी मंडी से चंद मीटर और इंजीनियरिंग कॉलेज से कुछ ही दूरी पर स्थित इस बस्ती में आज भी आजादी के दशकों बाद सड़क का अभाव बना हुआ है। अनिरुद्ध कुमार उर्फ ननके के घर से मुर्गहवा जाने वाला संपर्क मार्ग पूरी तरह कच्चा है, जो बरसात में कीचड़ और जलभराव से दलदल में तब्दील हो जाता है।
इस मार्ग पर रहने वाले सैकड़ों परिवार रोजाना जान जोखिम में डालकर आवागमन करने को मजबूर हैं। स्कूल जाने वाले बच्चों, बुजुर्गों, महिलाओं और मरीजों को सबसे अधिक परेशानी झेलनी पड़ती है। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार बच्चे कीचड़ में फिसलकर गिर चुके हैं, जबकि दोपहिया वाहन अक्सर फंस जाते हैं। बारिश के दिनों में लोगों का घरों से निकलना तक मुश्किल हो जाता है।
स्थानीय निवासियों के अनुसार वर्षों से ग्राम प्रधान से लेकर प्रशासनिक अधिकारियों तक गुहार लगाई जा चुकी है। विधायक, सांसद और विभिन्न जनसुनवाई कार्यक्रमों में भी सड़क निर्माण की मांग उठाई गई, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला। इतना ही नहीं, मुख्यमंत्री शिकायत पोर्टल पर भी कई बार शिकायत दर्ज कराई गई, लेकिन बिना मौके का निरीक्षण किए कागजी रिपोर्ट लगाकर शिकायतों का निस्तारण कर दिया गया। नतीजा यह है कि सड़क की स्थिति आज भी जस की तस बनी हुई है।
ग्रामीणों का आरोप है कि गोंडा शहर से सटा होने के बावजूद लक्ष्मनपुर हरिवंश विकास की मुख्यधारा से पूरी तरह कट गया है। लोगों ने बताया कि ग्राम प्रधान अंजू यादव और ग्राम पंचायत सचिव खेमराज वर्मा से कई बार सड़क निर्माण की मांग की गई, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई। विनय पाण्डेय, रमाकांत मिश्रा, राजकुमार गुप्ता, अनूप, अजय कुमार, अभिषेक अग्रहरि, राजेश कुमार, सुरेश कुमार, राम संजीवन, शिव ओम, राजन, अमित शर्मा, अनिल वर्मा, नागेश्वर प्रसाद सहित दर्जनों ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र सड़क निर्माण नहीं कराया गया तो वे मंडलायुक्त दुर्गा शक्ति नागपाल से मिलकर अपनी समस्या रखेंगे तथा आगामी विधानसभा चुनाव में जनप्रतिनिधियों के विरोध का अभियान चलाएंगे।
ग्रामीणों का कहना है कि जब तक सड़क निर्माण का कार्य शुरू नहीं होता, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते सड़क का निर्माण नहीं कराया गया तो बरसात के पूरे मौसम में सैकड़ों परिवारों को इसी तरह कीचड़, जलभराव और बदहाल रास्तों के सहारे जीवनयापन करना पड़ेगा, जो विकास के दावों पर गंभीर सवाल खड़े करता है।





