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अकीदत के साथ निकला इमाम हुसैन की सवारी का 170वां ऐतिहासिक दुलदुल जुलूस, उमड़ा अकीदतमंदों का सैलाब

हिंदू-मुस्लिमों ने पेश की कौमी एकता की मिसाल; मन्नत पूरी होने पर चढ़ाए सोने-चांदी के नींबू, खिलाई दूध-जलेबी

प्रशासनिक अफसरों और नेताओं ने पहनाई फूलों की माला, पूरी रात खुली रहीं सोने-चांदी और मिठाई की दुकानें

महोबा। हजरत इमाम हुसैन की सवारी घोड़ा का ऐतिहासिक तथा धार्मिक 170वां जुलूस मातमी धुनों, ढोल नगाड़ों, और अखाड़ों के साथ सौहाद्र्पूर्ण वातावरण में निकाला गया। हिन्दु मुस्लिम दोनों ही समुदाय के लोगों ने पूरी अकीदत के साथ दुलदुल (घोडा़) को दूध जलेबी खिलाई और सोने चांदी के नीबू चढ़ाकर अपनी अकीदत की मिशाल कायम की। दुलदुल जुलूस रात ग्यारह बजेे प्रारम्भ जो पूरी रात चलने के बाद सुबह दस बजे समापन हुआ। सुरक्षा की दृष्टि से दुलदुल जूलस में करीब डेढ़ सैकड़ा से ज्यादा पुलिस कर्मी तैनान किए गए, जिन्होंने अपनी ड्यूटी को अंजाम दिया।

हर साल मोहर्रम की सात तारीख को निकलने वाली हजरत इमाम हुसैन की सवारी (घोड़ा) का जुलूस अकीदत के साथ निकाला गया जिसमें उत्तर प्रदेश, मध्यम प्रदेश व अन्य प्रान्तों से आए हुए हजारों लोगों ने शिरकत कर जुलूस की रौनक बढ़ाई। दुलदुल जुलूस का शुभारम्भ एडीएम कुंवर पंकज और एएसपी वंदना सिंह ने घोड़े को फूलों की माला पहनाकर किया। इस अवसर पर पूर्व सांसद गंगाचरण राजपूत (बीजेपी) और सपा नेता पुष्पेंद्र यादव सहित विभिन्न राजनीतिक व सामाजिक दलों के नेता मौजूद रहे।

फातिहा के बाद जैसे ही इमाम चैक से घोड़ा बाहर निकला वैसे ही अकीदतमंदों की भीड़ दूध जलेबी खिलाने के लिए उमड़ पड़ी तथा जिन लोगों की मुराद पूरी हुई उन्होंने सोने व चांदी के नीबू चढ़ाते हुए अकीदत पेश की। दुलदुल जुलूस में भीड़ इतनी अधिक थी कि एक किलोमीटर का सफर तय करने में सवारी को करीब 12 घंटे से अधिक का समय लगा।

गौरतलब है कि ऐतिहासिक जुलूस का शुभारम्भ 1857 मे तत्कालीन महाराजा रतन सिंह जू देव के शासनकाल में प्रारम्भ हुआ था। मान्यता है कि जो भी श्रद्धा के साथ घोड़े पर लगे नीबू निकलता है और कोई जायज मन्नत मानता है तो एक साल में ही उसकी मुराद पूरी हो जाती है और मुराद पूरी होने पर लोग सोने व चांदी के नीबू चढ़ाकर अपनी अकीदत व्यक्त करते हैं। सोने चांदी की दुकानें रात भर खुली रहीं साथ ही नीबू व जलेबी खरीदने के लिए लोगों की मिठाई की दुकानों में तांता लगा रहा। पूरी रात सड़क गलियां और पटरियां लोगों से पटी दिखाई दीं।

बेतहाशा भीड़ के बीच जुलूस कामयाबी के साथ अंतिम सफर की ओर बढ़ता रहा। हजारों की भीड़ के बीच शान्ति एवं सुरक्षा व्यवस्था महत्वपूर्ण पहले माना जाता है जिसे प्रशासन ने बखूबी निभाया। शान्ति एवं सुरक्षा व्यवस्था के लिए जिले के सभी थानों की फोर्स के अलावा भारी संख्या में पीएसी बल मौजूद रहा। इस आयोजन में स्थानीय हिंदू समुदाय की भी सक्रिय भागीदारी रहती है। कई पीढ़ियों से हिंदू स्वर्ण व्यवसायी चांदी के नींबू बेचने की दुकानें लगाते आ रहे हैं।

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