अमेरिका-ईरान समझौते के बावजूद इजरायल ने लेबनान सीमा से सेना हटाने से इनकार कर दिया है। रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज ने कहा कि देश अपनी सुरक्षा के लिए मौजूदा स्थिति से पीछे नहीं हटेगा।
अमेरिका और ईरान के बीच हुए अहम समझौते के एलान के बाद जियोपॉलिटिकल तनाव तेजी से बढ़ गया है। इस बीच इजरायल के रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज ने साफ कर दिया है कि इजरायली सेना सीमा पर अपनी मौजूदा स्थिति से पीछे नहीं हटेगी।
उन्होंने अमेरिका की अगुवाई में हाल ही में घोषित कूटनीतिक रूपरेखा को स्पष्ट रूप से नकार दिया है। इजरायली मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, यरूशलेम ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप को साफ तौर पर बता दिया है कि वह सेना की वापसी के लिए तय अंतरराष्ट्रीय समय-सीमा का पालन नहीं करेगा।
‘एक कदम पीछे नहीं हटेंगे’
इजरायली मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज ने राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर एक बहुत ही मजबूत रुख अपनाया है। उन्होंने साफ कर दिया है कि बाहरी कूटनीतिक दबावों के कारण देश की मौजूदा रक्षात्मक तैनाती में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। इजराइल की सुरक्षा नीति के बारे में बताते हुए रक्षा मंत्री ने कहा, “इजरायली नागरिकों की सुरक्षा के लिए आईडीएफ (इजरायली सेना) लेबनान, सीरिया और गाजा के सुरक्षा क्षेत्रों में अनिश्चित काल तक बनी रहेगी।”
काट्ज ने इस कड़े रुख को और मजबूत करते हुए पुष्टि की कि यरूशलेम ने हाल ही में हुए समझौते की शर्तों को लेकर अपने सबसे करीबी सहयोगी के सामने अपना पक्ष मजबूती से रखा है।
‘इजरायल पूरी ताकत से देगा जवाब’
रक्षा मंत्री ने जोर देकर कहा, “हम लेबनान से पीछे हटने का कड़ा विरोध करते हैं और हमने अमेरिका को यह बात साफ तौर पर बता दी है।” साथ ही, उन्होंने उत्तरी सीमा पर तनाव बढ़ने की किसी भी संभावना को लेकर तेहरान को कड़ी और सीधी चेतावनी देते हुए कहा, “अगर ईरान ने लेबनान को लेकर हमला किया तो इजरायल पूरी ताकत के साथ जवाबी कार्रवाई करेगा।”
काट्ज आगे कहा, “मौजूदा और भविष्य के तमाम दबावों के बावजूद इजरायल लेबनान से पीछे नहीं हटेगा।” साथ ही यह भी कहा कि प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप को यह बात साफ-साफ बता दी थी।
‘हम अमेरिका से बंधे हुए नहीं’
इजरायल के कड़े रुख को और मजबूती तब मिली जब इजरायल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-ग्विर ने वॉशिंगटन की मध्यस्थता वाली कूटनीतिक कोशिशों की तीखी आलोचना की। उन्होंने साफ कहा कि देश बाहरी कूटनीतिक समझौतों से बंधा हुआ नहीं है और अपनी पूर्ण राष्ट्रीय संप्रभुता पर कायम है।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के साथ डील पूरी होने की घोषणा के बाद मंत्री ने कहा कि अमेरिका के नेतृत्व वाली पहल से घरेलू या सैन्य नीति तय नहीं होती है। उन्होंने इजरायल की भू-राजनीतिक आजादी पर जोर दिया।
सोशल मीडिया पर अपना कड़ा विरोध जताते हुए बेन-ग्विर ने कहा कि इजरायल किसी विदेशी ताकत के अधीन नहीं रहेगा। उन्होंने एक्स पर पोस्ट किया, “ट्रंप का समझौता हम पर लागू नहीं होता। इजरायल अमेरिका के अधीन नहीं है और हम एक आजाद और संप्रभु देश हैं! हमारा फर्ज इजरायल के नागरिकों, आईडीएफ के सैनिकों और यहूदी लोगों के प्रति है। साथ ही, हजारों सालों के निर्वासन के दौरान सताए गए और मारे गए यहूदियों के प्रति हमारा ऐतिहासिक फर्ज है कि हम इजरायल की धरती पर यहूदियों को सुरक्षा दें।”
राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री ने पुरानी कूटनीतिक रणनीतियों को दोहराने के खिलाफ चेतावनी दी और ऐसे ऐतिहासिक उदाहरणों का जिक्र किया जिनमें अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन करने के कारण देश के भीतर गंभीर नतीजे भुगतने पड़े थे।
‘हम बनाना रिपब्लिक नहीं’
बेन-ग्विर ने आगे कहा, “जब भी हमने इजरायल की सुरक्षा से समझौता करके अंतरराष्ट्रीय दबाव के आगे घुटने टेके तो हमें उसकी भारी कीमत चुकानी पड़ी। ओस्लो समझौते, 2006 के लेबनान समझौते और गाजा में हालात को काबू में रखने की हर कोशिश के मामले में ऐसा ही हुआ और हर बार नतीजा बहुत बुरा रहा। हम जोर देकर कहते हैं: हम अमेरिका से प्यार करते हैं और राष्ट्रपति ट्रंप के आभारी हैं। फिर भी, इजरायल कोई ‘बनाना रिपब्लिक’ (कमजोर या अस्थिर देश) नहीं है। मैं प्रधानमंत्री से हमेशा ये बातें कहता हूं और हर अहम ऐतिहासिक मोड़ पर बंद कमरों में भी उन्हें दोहराता हूं।”
बहुत कड़ा रुख अपनाते हुए इजरायली मंत्री ने दावा किया कि लेबनान से इजरायल की ओर आने वाले हर ड्रोन या मिसाइल का जवाब प्रॉक्सी गुटों के अहम ठिकानों पर तुरंत जवाबी हमला करके दिया जाएगा।
उन्होंने कहा, “मेरा रुख साफ है: हम इस समझौते का हिस्सा नहीं हैं, क्योंकि यह हमारी सुरक्षा की गारंटी नहीं देता और न ही हम पर किसी तरह की कोई पाबंदी लगाता है। हमें हिजबुल्लाह को पूरी तरह खत्म करने से कम किसी भी चीज पर समझौता नहीं करना चाहिए। हमें उन इलाकों से पीछे नहीं हटना चाहिए जिन पर हमारे लड़ाकों ने कब्जा किया है और जहां से आतंकी ढांचे को साफ किया है। हमें ऐसी स्थिति में वापस नहीं जाना चाहिए जहां हजारों आतंकवादी उत्तरी बस्तियों की सीमाओं पर बैठे हों और निश्चित रूप से इजरायल पर होने वाले हमलों के सामने हमें एक पल के लिए भी चुप नहीं रहना चाहिए।”
बेन-ग्विर ने आगे कहा, “हमें यह साफ कर देना चाहिए: लेबनान से इजरायल की तरफ ड्रोन, यूएवी या मिसाइल छोड़े जाने पर इजरायल दहिया में हमला करेगा। कुछ महीने पहले तक यही ‘डिटरेंस बैलेंस’ (शक्ति संतुलन) था और हमें इसे किसी भी हाल में नहीं छोड़ना चाहिए। और सबसे बड़ी बात हमें सभी को यह साफ बता देना चाहिए: इजरायल के लोग 3,000 साल पुराने लोग हैं, एक ऐसे अमर लोग जो लंबे सफर से नहीं डरते। हमें दुनिया बनाने वाले पर भरोसा है और अब दुश्मनों के सामने झुकने का हमारा कोई इरादा नहीं है। वे दिन बीत चुके हैं जब यहूदी मार खाते थे और चुप रहते थे।”





