विश्व बाल श्रम निषेध दिवस के अवसर पर भारत-नेपाल सीमा क्षेत्र खुनुवा में बाल श्रम के खिलाफ व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया गया। उत्तर प्रदेश सरकार के बाल श्रम मुक्त उत्तर प्रदेश तथा बाल श्रम मुक्त सिद्धार्थनगर अभियान के तहत आयोजित इस कार्यक्रम में सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी), पुलिस विभाग, पीआरसी एवं मानव संसाधन में महिला विकास संस्थान के प्रतिनिधियों ने संयुक्त रूप से लोगों को बाल श्रम के प्रति जागरूक किया। अभियान के दौरान खुनुवा बाजार, सार्वजनिक स्थलों, दुकानों एवं व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर बाल श्रम उन्मूलन, बच्चों के अधिकारों और शिक्षा के महत्व से जुड़े जागरूकता स्टिकर लगाए गए। टीम के सदस्यों ने दुकानदारों, व्यापारियों, अभिभावकों एवं स्थानीय नागरिकों से संवाद कर बाल श्रम के सामाजिक और कानूनी दुष्परिणामों की जानकारी दी।
साथ ही लोगों से अपील की गई कि वे बच्चों को श्रम में लगाने के बजाय विद्यालय भेजने में सहयोग करें। इस अवसर पर एसएसबी के निरीक्षक नीरज शर्मा ने कहा, “बच्चे देश का भविष्य हैं। उन्हें शिक्षा, सुरक्षा और बेहतर अवसर उपलब्ध कराना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। बाल श्रम न केवल बच्चों के अधिकारों का हनन है, बल्कि समाज के विकास में भी बाधक है। यदि हम एक सशक्त और शिक्षित समाज का निर्माण करना चाहते हैं तो हमें बाल श्रम जैसी कुरीतियों को जड़ से समाप्त करना होगा।” उन्होंने आगे कहा कि सीमा क्षेत्र में रहने वाले प्रत्येक नागरिक को बाल श्रम के प्रति संवेदनशील होना चाहिए तथा किसी भी बच्चे को मजदूरी करते हुए देखने पर संबंधित विभाग को इसकी सूचना देनी चाहिए।
कार्यक्रम में एसएसबी के निरीक्षक नीरज शर्मा, पुलिस चौकी खुनुवा प्रभारी सुरेश यादव, उपनिरीक्षक कृष्णा कुमार शर्मा, अजीत यादव एवं पप्पू गुप्ता सहित अन्य सुरक्षा कर्मियों ने सहभागिता की। मानव संसाधन में महिला विकास संस्थान की ओर से जिला समन्वयक (एमआईएस) अभिषेक मिश्रा, ब्लॉक प्रोग्राम ऑफिसर अमन शर्मा, विजय शंकर यादव, काजल श्रीवास्तव, सपना त्रिपाठी, प्रमोद चौधरी, नीतू भारती, आकाश कौशल,सुनीता केसी तथा अन्य टीम सदस्यों ने अभियान को सफल बनाने में सक्रिय भूमिका निभाई। अभियान के समापन पर उपस्थित अधिकारियों एवं प्रतिभागियों ने बाल श्रम मुक्त समाज के निर्माण हेतु निरंतर जनजागरूकता फैलाने और बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिए मिलकर कार्य करने का संकल्प लिया।





