महोबा। संत कबीर अमृत वाणी सत्संग समिति के तत्वावधान में रविवार को शहर के कबीर आश्रम में सत्संग कार्यक्रम का आयोजन किया गया। सत्संग में सर्वप्रथम जय कबीर जय गुरू कबीर, दास तोरे द्वार खड़े उनकी हरो पीरा कबीर वंदन हुई, इसके बाद विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर आश्रम में पौध रोपित किए गए साथ ही उपस्थित लोगों ने पर्यावरण संरक्षण का व्रत लिया। सत्संग मंें वक्ताओं ने सत्य का मार्ग अपनाने पर जोर दिया साथ ही मनुष्य के जीवन में वृक्षों के महत्व पर भी विस्तार से जानकारी दी।
समिति प्रमुख डाॅ. एलसी अनुरागी ने कहा कि विश्व पर्यावरण दिवस पर सभी लोगों ने पर्यावरण संरक्षण का व्रत लिया साथ ही पौध भी रोपित किए, बावजूद इसके प्रकृति रूठी हुई है और पर्यावरण असंतुलि है, इसलिए जितने भी पौधे रोपित किए जाएं उनके वृक्ष बनने तक देखभाल करने का भी संकल्प लेना चाहिए। कहा कि वृक्ष की छाल, तना, पत्ते सभी औषधि है।
वृक्ष सर्दी, गर्मी, आंधी तूफान को सहन करके हमे फल के साथ छाया प्रदान करते हैं। उन्होंने कबीरी दोहा सुनाया कि वृक्ष कबहुं न फल भखै, नदी न संचय नीर, परमार्थ के कारने, साधुन धरा शरीर। उन्होंने कहा कि यह दोहा त्याग और परमार्थ की सीख देता है। पेड़ अपने उगाए फल स्वयं नहीं खाते, नदियां अपने में जल रोक कर नहीं रखती वे सब दूसरों के हित के लिए ही अस्तित्व में हैं और सज्जन व्यक्ति भी अपना जीवन दूसरों की भलाई में लगाता है।
सत्संग में वरिष्ठ कवि हरिश्चंद्र वर्मा ने रचना सुनाई कि हे कबीर दुनिया को तपन, घृणा युद्ध से बचाओ, शांति का वातारण लाओ। पंडित हरिशंकर नायक ने कहा कि चारो वेदो, 6 शास्त्रों, 18 पुराणों का सार सत्य का आचरण है और यह सत्संग से प्राप्त होती है। अधिवक्ता सुनीता अनुरागी ने कहा कि आज लोग अनैतिकता की ओर बढ़ रहे, लेकिन सत्संग नैतिकता की ओर लाता है इसलिए सत्संग सभी कार्य छोड़कर करना चाहिए। पंडित अवधेश अवस्थी ने कहा कि सत्संग के प्रााव से कौए भी हंस बन जाते हैं।
इस मौके पर रामऔतार, जगदीश रिछारिया ने भजन दर्जन दो घनश्याम दास मोरी अंखियां प्यासी प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में राजाराम चैरसिया, विनोद सोनी, आशाराम तिवारी ने भी भजन सुनाकर लोगों का मंत्रमुग्ध कर दिया। इस मौके पर संगीत शिक्षक त्रिलोक, सीताराम पुरवार, कमलापत आदि लोग मौजूद रहे। अंत में समिति प्रमुख ने प्रसाद वितरण का सत्संग समापन की घोषणा की।





