प्राचीन मंदिर के पास कई घंटों तक धधकता रहा कचरा, एनजीटी नियमों के उल्लंघन के आरोप
कर्नलगंज (गोण्डा)। नगर क्षेत्र के सकरौरा घाट स्थित प्राचीन मंदिर के निकट कूड़े के विशाल ढेर में आग लगने से पूरे इलाके में जहरीला धुआं फैल गया। धुएं के कारण श्रद्धालुओं, स्थानीय नागरिकों और राहगीरों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। घटना के बाद नगर पालिका की कार्यशैली और कूड़ा प्रबंधन व्यवस्था को लेकर लोगों में नाराजगी दिखाई दे रही है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि कूड़े का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण कराने के बजाय उसमें आग लगवा दी गई, जिससे वातावरण प्रदूषित हो गया। आग लगने के बाद लंबे समय तक धुआं उठता रहा और मंदिर परिसर सहित आसपास के क्षेत्रों में धुएं की चादर छाई रही। श्रद्धालुओं का कहना है कि धार्मिक स्थल के निकट इस प्रकार कूड़ा जलाया जाना न केवल पर्यावरण के लिए हानिकारक है, बल्कि आस्था के केंद्र की गरिमा के भी विपरीत है।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कूड़े के ढेर में लगी आग ने धीरे-धीरे विकराल रूप धारण कर लिया। आग और धुएं को बढ़ता देख दमकल विभाग को बुलाया गया, जिसके बाद काफी प्रयास के बाद आग पर काबू पाया जा सका। हालांकि आग बुझने के बाद भी काफी देर तक धुआं निकलता रहा।
क्षेत्रवासियों ने आरोप लगाया है कि खुले में कूड़ा जलाकर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के दिशा-निर्देशों की अनदेखी की गई है। उनका कहना है कि कूड़ा जलाने से निकलने वाला धुआं लोगों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है। लोगों ने यह भी सवाल उठाया कि धार्मिक एवं पर्यटन स्थल के समीप कूड़ा डंप करने और बाद में उसे जलाने की अनुमति किसने दी।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि सकरौरा घाट क्षेत्र लंबे समय से कूड़े की समस्या से जूझ रहा है। समय रहते कूड़े का उचित निस्तारण किया जाता तो ऐसी स्थिति उत्पन्न नहीं होती। क्षेत्रवासियों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराए जाने, जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने तथा कूड़े के वैज्ञानिक एवं पर्यावरण-अनुकूल निस्तारण की स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित किए जाने की मांग की है। समाचार लिखे जाने तक नगर पालिका अथवा संबंधित अधिकारियों का पक्ष प्राप्त नहीं हो सका था। घटना के बाद क्षेत्र में पर्यावरण संरक्षण और कूड़ा प्रबंधन को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है।





