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विद्युत चोरी के मुकदमे पर पूर्व विधायक आदित्य पाण्डेय ने जताई आपत्ति, निष्पक्ष जांच की मांग

फतेहपुर। जहानाबाद क्षेत्र के कौह गांव में पूर्व विधायक आदित्य पाण्डेय के खिलाफ दर्ज विद्युत चोरी के मुकदमे को लेकर विवाद गहरा गया है। पूर्व विधायक ने प्रेस वार्ता कर इस मुकदमे को फर्जी बताते हुए इसे राजनीतिक साजिश का हिस्सा बताया है। वहीं विद्युत विभाग ने अपनी कार्रवाई को नियमों के अनुरूप और जांच के आधार पर किया गया बताया है।

प्रेस वार्ता के दौरान आदित्य पाण्डेय ने कहा कि उनके खिलाफ दर्ज कराया गया मुकदमा पूरी तरह से निराधार है। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी राजनीतिक छवि को नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से सुनियोजित तरीके से यह कार्रवाई कराई गई है। उन्होंने बताया कि कौह गांव स्थित उनका ईंट भट्ठा वर्ष 2017 से बंद पड़ा है और वहां किसी प्रकार की व्यावसायिक गतिविधि नहीं हो रही है। साथ ही वह लंबे समय से कानपुर में रह रहे हैं और भट्ठे की नियमित देखरेख भी नहीं करते हैं।

पूर्व विधायक का कहना है कि जिस स्थान को आधार बनाकर विद्युत चोरी का मामला दर्ज किया गया है, वह पूरी तरह बंद पड़ा हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोगों ने बंद पड़ी कोठरी में तार डालकर विद्युत पोल से जोड़ दिया और उसका वीडियो बनाकर विभागीय अधिकारियों को दिखाया, जिसके बाद बिना गहन जांच किए उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज करा दिया गया। आदित्य पाण्डेय ने बताया कि उन्होंने पूरे मामले की शिकायत प्रदेश के ऊर्जा मंत्री से की है और निष्पक्ष व उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।

उनका कहना है कि यदि मामले की पारदर्शी जांच कराई जाती है तो सच्चाई सामने आ जाएगी और यह स्पष्ट हो जाएगा कि उन्हें जानबूझकर फंसाने का प्रयास किया गया है। वहीं विद्युत विभाग ने पूर्व विधायक के आरोपों को खारिज किया है। विभाग के अधीक्षण अभियंता ने बताया कि विद्युत चोरी का मुकदमा विभागीय जांच के आधार पर दर्ज कराया गया है। उन्होंने कहा कि संबंधित क्षेत्र के अवर अभियंता और विभागीय टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच की थी, जिसमें विद्युत पोल से अवैध रूप से बिजली लिए जाने के प्रमाण मिले थे।

इसके बाद नियमानुसार मुकदमा दर्ज कराया गया। अधीक्षण अभियंता ने कहा कि विभाग की कार्रवाई पूरी तरह नियमों के अनुरूप है और इसमें किसी प्रकार की राजनीतिक भावना या व्यक्तिगत द्वेष शामिल नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि किसी को विभागीय कार्रवाई पर आपत्ति है तो वह सक्षम स्तर पर अपनी बात रख सकता है। मामले को लेकर जिले के राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। एक ओर पूर्व विधायक इसे राजनीतिक साजिश बता रहे हैं, जबकि दूसरी ओर विद्युत विभाग अपनी कार्रवाई को सही ठहरा रहा है। फिलहाल पूरे मामले में आगे की जांच और कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

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