आजमगढ़। सरकारी तंत्र में व्याप्त भ्रष्टाचार और जनसुनवाई न होने से आक्रोशित आज़ाद अधिकार सेना के तत्वाधान में चल रहा अनिश्चितकालीन धरना अब उग्र रूप लेता जा रहा है। धरने के 13 दिन बीतने के बाद भी जब प्रशासन की नींद नहीं टूटी, तो 14वें दिन पीड़ित जनता और संगठन के पदाधिकारियों ने एक अनोखा और कड़ा विरोध प्रदर्शन किया। आंदोलनकारियों ने जनपद के भ्रष्ट अधिकारियों को ‘मृत’ मानते हुए वैदिक रीति-रिवाज से उनका पिंडदान कर दिया।
भ्रष्टाचार के खिलाफ इस आर-पार की लड़ाई में आज़ाद अधिकार सेना के जिलाध्यक्ष अशोक सिंह और प्रदेश महासचिव सिंहासन चौहान ने सर्वप्रथम अपना सिर मुड़वाया। इसके पश्चात सनातन वैदिक पूजन पद्धति के अनुसार जनपद की सभी तहसीलों के भ्रष्ट अधिकारियों के प्रतीक स्वरूप 8 पिंडदान किए गए।
जिलाध्यक्ष अशोक सिंह ने प्रशासनिक संवेदनहीनता पर तीखा प्रहार करते हुए कहा “ये अधिकारी जीवित होकर भी जनता के लिए मृत समान हैं। इसलिए आज इनका पिंडदान किया गया है, ताकि इन भ्रष्ट अधिकारियों की आत्माएं इस जिले को छोड़कर अपने लोक को चली जाएं और यहां की पीड़ित जनता को न्याय व सुरक्षा मिल सके।” पदाधिकारियों ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि जिले में IGRS और RTI के नाम पर बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा चल रहा है।
बाढ़ पीड़ित महासचिव राजीव मिश्रा ने कहा कि इस धरने की गूंज सत्ताधारी दल के भीतर भी सुनाई दे रही है। अहरौला थाने से पीड़ित स्थानीय भाजपा पदाधिकारी रानी चौरसिया भी न्याय की आस में इस धरने में शामिल हैं। उनका आरोप है कि जब वह अपने साथ हुए अन्याय की मांग को लेकर अहरौला एसओ के पास गईं, तो न्याय देने के बजाय उन्हें ही मुकदमा लिखने की धमकी दी जा रही है। इस घटनाक्रम ने सरकार के ‘जीरो टॉलरेंस’ के दावों पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
प्रशासन के अड़ियल रवैये से नाराज पदाधिकारियों ने अब सीधे तौर पर आर-पार की चेतावनी दे दी है। उन्होंने साफ कहा कि यदि जल्द ही उनकी मांगों पर विचार नहीं किया गया, तो अब वे खुद जिलाधिकारी (DM) के काफिले का घेराव करेंगे और सीधे पूछेंगे कि सरकार और प्रशासन उन्हें ‘न्याय देगा या लाठी’।





