Monday, May 18, 2026
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ढेबरुआ थाना क्षेत्र का मधवानगर गांव बना नशेड़ियों का अड्डा, बड़े पैमाने पर हो रहा स्मैक का कारोबार

जिम्मेदारों की उदासीनता से स्मैक के कारोबार पर नहीं लग पा रहा लगाम, बर्बाद हो रही युवा पीढ़ी

कई बार खबर छपने के बाद भी सुरक्षा एजेंसियों की नही पड़ रही नजर या फिर किया जा रहा नजर अंदाज,बना चर्चा का विषय, कार्रवाई की मांग

बढ़नी सिद्धार्थनगर। जनपद के ढेबरुआ थाना क्षेत्र में जिम्मेदारों की उदासीनता से स्मैक के कारोबार पर लगाम लगता हुआ दिखाई नही दे रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में कोई कार्रवाई नहीं होने के कारण नशे का कारोबार शहर से लेकर गांव तक फल-फूल रहा है। जिसके चपेट में आकर तमाम युवा पीढ़ी बर्बाद हो रहे है। सूत्रों की मानें तो बढ़नी क्षेत्र में कुछ छोटे मोटे कारोबारियों पर स्थानीय पुलिस एवं एसएसबी की संयुक्त कार्रवाई की गई थी।

जो जेल से छूटने के बाद फिर उसी कारोबार में संलिप्त बताये जाते हैं। अभी बीते कुछ माह पहले नगर पंचायत बढ़नी में स्मैक कारोबार को लेकर स्थानीय लोगों ने आवाज उठाया था। जिसके कारण काफी विवाद भी हुआ था। स्मैक से जुड़े कई विडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो चुका है। जिसके बाद पुलिस की सक्रियता बढ़ने से स्मैक कारोबारियों ने ग्रामीण क्षेत्रों को अपना सुरक्षित ठिकाना बना लिया है। जो पास का गांव मधवानगर इन दिनों काफी सुर्खियों में है।

बताया जाता है कि सरयू नहर से लेकर ब्लाक मुख्यालय के आसपास तक दिन रात तमाम बाहरी लोगों का आना-जाना लगा रहता है। जिसमें कई नेपाली नागरिक देखे जा सकते हैं। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि नशेड़ियों के डर से घर की महिलाओं को खेत खलिहान व बाजार आने जाने में डर लगा रहता है। आस पास के क्षेत्रों में बाइक चोरी व छीना झपटी सहित कई घरों में चोरी की घटनाएं हो चुकी है। जिससे लोगों में दहशत का माहौल बना हुआ है।

कुछ लोगों ने नाम न छापने की शर्त पर दबी जुबान से कहना है कि गांव में कुछ ऐसे कारोबारी हैं,जो काफी दिनों से नशे के कारोबार में संलिप्त हैं,और बड़े पैमाने पर अपना नेटवर्क बनाकर नेपाल तक नशीले पदार्थो का करोबार कर मालामाल हो रहे हैं। उन्हें गांव समाज व बर्बाद हो रहे युवा पीढ़ी की कोई चिंता नही है। ऐसे नशा तस्कर जो देश और समाज के लिए खतरा बने हुए हैं। स्मैक कारोबारी सुरक्षा एजेंसियों की नजर से बचते हुए कार्रवाई का ना होना कई सवाल खड़े कर रहा है। जबकि कई बार खबरें भी प्रकाशित हो चुकी है।अब देखने वाली बात होगी कि ऐसे मामलों में कार्रवाई कब होती है।

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