पश्चिम बंगाल में चुनाव बाद हिंसा पर जुबानी जंग तेज हो गई है। भाजपा ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि टीएमसी की आपसी गुटबाजी से मौतें हो रही हैं, जबकि भाजपा सरकार ने राजनीतिक हिंसा पर लगाम लगाई है।
बंगाल के राजनीतिक गलियारों में चुनाव-पश्चात हिंसा को लेकर जुबानी जंग बेहद तेज हो गई है। तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी द्वारा नई सरकार पर लगाए गए हिंसा के आरोपों को भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य ने पूरी तरह निराधार और राजनीतिक रूप से प्रेरित बताते हुए खारिज कर दिया है।
भट्टाचार्य ने पलटवार करते हुए दावा किया कि वास्तव में चुनाव परिणाम आने के बाद से तृणमूल समर्थित उपद्रवियों ने भाजपा के तीन कार्यकर्ताओं की बेरहमी से हत्या की है। उन्होंने कहा कि राज्य में हो रही अन्य मौतें भाजपा के कारण नहीं, बल्कि तृणमूल के भीतर चल रही आपसी गुटबाजी और वर्चस्व की लड़ाई का नतीजा हैं।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने इस बात पर जोर दिया कि राज्य में भाजपा की सरकार बनने के बाद से बंगाल की वर्षों पुरानी राजनीतिक हिंसा की कलंकित संस्कृति पर विराम लगा है। उन्होंने इसे एक ऐतिहासिक बदलाव बताते हुए कहा कि वर्तमान में आम जनता बिना किसी खौफ के शांतिपूर्ण जीवन जी रही है। कानून व्यवस्था को भंग करने का प्रयास करने वाले किसी भी अराजक तत्व को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे उसका राजनीतिक रसूख कुछ भी हो।
ममता के खिलाफ लगे नारे
भट्टाचार्य ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह बंगाल की स्थिति पर चौबीसों घंटे पैनी नजर रख रहे हैं। इस बीच, कलकत्ता हाई कोर्ट परिसर में ममता बनर्जी के खिलाफ लगे ‘चोर’ के नारों पर दुख जताते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसी अभद्र भाषा और व्यवहार भाजपा की संस्कृति का हिस्सा नहीं हैं।
हालांकि, उन्होंने इस आक्रोश के लिए टीएमसी की अतीत की उकसावे वाली राजनीति को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने विपक्ष से अपील की कि अब कीचड़ उछालने की राजनीति को छोड़कर बंगाल के औद्योगिक विकास और युवाओं के रोजगार पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए।





