फारूक अब्दुल्ला ने आरएसएस के दत्तात्रेय होसबोले के भारत-पाकिस्तान वार्ता संबंधी बयान का स्वागत किया है। उन्होंने जोर दिया कि दोनों देशों के बीच बातचीत से ही सभी मसलों का समाधान संभव है।
नेशनल कान्फ्रेंस के अध्यक्ष और जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्मयंत्री डा फारूक अब्दुल्ला ने आरएसएस के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले के पाकिस्तान से बातचीत संबंधी बयान का स्वागत करते हुए कहा कि हम पाकिस्तानी नहीं, हिंदुस्तानी हैं। दोनों देशों के बीच बातचीत के जरिए मसले का समाधान होना चाहिए।
यहां शेर-ए-कश्मीर इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में यस इंडिया फाउंडेशन द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में फारूक ने देश के विभिन्न भागों से आए युवाओं के साथ बातचीत में मौजूदा ईरान-अमेरिका सैन्य संघर्ष पर चिंता जताते हुए भारत-पाक संबंधों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि दुनिया की भलाई के लिए लड़ाई बंद होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि आरएसएस के एक बड़े नेता और हमारे पूर्व सैन्य प्रमुख जनरल नरवने के पाकिस्तान के साथ बातचीत करने का बयान एक अच्छा संकेत है। नई दिल्ली में जारी ब्रिक्स शिखर सम्मेलन संबंधी पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि यह समूह पश्चिम एशिया में शांति स्थापित करने में मदद करेगा। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चीन यात्रा का भी स्वागत किया।
संकट से निपटने को PM का कदम जरूरी
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा अपने काफिलों में शामिल वाहनों की संख्या घटाने संबंधी सवाल के जवाब में नेशनल कान्फ्रेंस के अध्यक्ष ने कहा कि ईंधन संकट से निपटने के लिए ऐसे कदम जरूरी हैं। भारत में भी वास्तविक ईंधन की कमी लग रही है।
आज हमारे प्रदेश के युवक देश के अन्य राज्यों में जाकर पढ़ने से डरते हैं, क्योंकि मजहब के नाम पर उन्हें निशाना बनाया जाता है। इसलिए हम चाहते हैं कि यह नफरत समाप्त हो। उन्होंने मुस्लिमों में शिक्षा के प्रसार पर जोर दिया। शिक्षा और ज्ञान का सही इस्तेमाल होना चाहिए।
अल्ताफ बुखारी ने केंद्र को दी नसीहत
वहीं जम्मू-कश्मीर अपनी पार्टी के चेयरमैन सैयद अल्ताफ बुखारी ने कहा कि पाकिस्तान के साथ बातचीत होनी चाहिए या नहीं होनी चाहिए, यह फैसला केंद्र सरकार-नई दिल्ली कर सकती है। लेकिन जम्मू कश्मीर के लोगों के साथ केंद्र को बातचीत की प्रक्रिया यथाशीघ्र बहाल करनी चाहिए।
बुखारी ने कहा कि पाकिस्तान के साथ बातचीत पर आरएसएस के महासचिव दत्तात्रेय होसबोले और पूर्व सैन्य जनरल मनोज नरवणे के विचार लगभग एक समान हैं और दोनों के विशेष मायने हैं, जिन पर केंद्र सरकार मौजूदा आंतरिक और बाहरी हालात का आकलन कर अपने विवेकानुसार निर्णय लेगी।





