पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ने के बावजूद HPCL, BPCL और IOCL जैसी सरकारी तेल कंपनियों के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। यह गिरावट वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि और घरेलू मूल्य वृद्धि के कम होने के कारण निवेशकों की कमजोर भावना का परिणाम है।
पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है। इसके बावजूद शेयर बाजार में शुक्रवार को सरकारी तेल कंपनियों जैसे हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL), भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) और इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOCL) के शेयरों में गिरावट देखी गई। आखिर जब तेल महंगा हो रहा है और कंपनियों की कमाई बढ़ने की उम्मीद है, तो उनके शेयर क्यों टूट रहे हैं? आइए इसे विस्तार से समझते हैं।
शेयरों में कितनी आई गिरावट?
BSE पर HPCL के शेयर 2.65% गिरकर ₹367.10 के निचले स्तर पर आ गए। BPCL के शेयरों में 2% की गिरावट आई और यह ₹289.05 पर ट्रेड कर रहे थे। वहीं, IOCL के शेयर भी 0.6% फिसलकर ₹139.35 पर आ गए।
कीमतें बढ़ने पर भी शेयर क्यों गिरे?
तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के बावजूद निवेशकों का सेंटिमेंट कमजोर रहा। इसकी मुख्य वजह यह है कि ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार हो रहे उछाल के मुकाबले, घरेलू स्तर पर ₹3 की बढ़ोतरी बाजार की उम्मीदों से काफी कम थी।
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के मुख्य निवेश रणनीतिकार वीके विजयकुमार ने कहा, ”पेट्रोल और डीजल की कीमतों में ₹3 प्रति लीटर और CNG में ₹2 प्रति किलोग्राम की बढ़ोतरी दिखाती है कि सरकार महंगाई को अचानक बढ़ने से रोकने के लिए छोटे-छोटे कदम उठा रही है। यह एक स्वागत योग्य कदम है।”
ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल का क्या हाल है?
ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं, जिससे फ्यूल मार्केटिंग मार्जिन को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं। ब्रेंट क्रूड ऑयल 107 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया है और इस हफ्ते इसके फ्यूचर्स में लगभग 6% की तेजी आई है। वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट क्रूड भी 102 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बना हुआ है।
क्या है डोनल्ड ट्रम्प का बयान और इसका असर?
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात के बाद फॉक्स न्यूज को दिए एक इंटरव्यू में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प ने कहा कि उन्हें होर्मुज जलडमरूमध्य को खुला रखने की आवश्यकता नहीं है। इस बयान ने बाजार की चिंताओं को और बढ़ा दिया है, क्योंकि इस क्षेत्र में तनाव के कारण ऊर्जा बाजारों में पहले से ही भारी उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है।
OMCs को कितना नुकसान हो रहा था?
पिछले कई महीनों से ग्लोबल कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने के बावजूद, ओएमसी ने पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया था। इसके कारण उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ रहा था।
आधिकारिक अनुमानों के अनुसार, मध्य पूर्व संकट के बाद वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में भारी वृद्धि के बावजूद घरेलू ईंधन की कीमतों में संशोधन न होने के कारण सरकारी तेल विपणन कंपनियों को पेट्रोल की बिक्री पर लगभग ₹20 प्रति लीटर और डीजल की बिक्री पर लगभग ₹100 प्रति लीटर का नुकसान हो रहा था। हालांकि, कुछ उद्योग अनुमानों ने डीजल की अंडर-रिकवरी कम बताई थी।





