Saturday, May 9, 2026
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कुकरैल नाइट सफारी के लिए बस अंतिम मुहर का इंतजार… 13 मई को SC में होगी सुनवाई, मिलेगा सिंगापुर जैसा रोमांच

लखनऊ में प्रस्तावित कुकरैल नाइट सफारी की अंतिम बाधा 13 मई को सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई से दूर हो सकती है।

लखनऊ। राजधानी लखनऊ में प्रस्तावित कुकरैल नाइट सफारी की अंतिम बाधा 13 मई को दूर हो सकती है। इस दिन सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई होनी है।

नाइट सफारी बनने से पर्यावरण पर क्या प्रभाव पड़ेगा इसकी जांच सुप्रीम कोर्ट की केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति (सीईसी) ने करने के बाद अपनी रिपोर्ट पिछले वर्ष 27 नवंबर को ही सौंप दी थी। तब से अब तक आधा दर्जन से अधिक बार सुप्रीम कोर्ट में इस केस की तारीख लग चुकी है किंतु सुनवाई नहीं हो सकी है।

अब 13 को सुनवाई की फिर से तिथि लगी है। कोर्ट से हरी झंडी मिलने के बाद बहुप्रतीक्षित नाइट सफारी का काम शुरू हो हो सकेगा। योगी सरकार देश की पहली व विश्व की पांचवीं नाइट सफारी लखनऊ में बनवाना चाहती है।

अभी सिंगापुर, थाइलैंड, चीन व इंडोनेशिया में नाइट सफारी हैं। चूंकि कुकरैल आरक्षित वन क्षेत्र होने से नाइट सफारी बनाने के लिए सुप्रीम कोर्ट की स्वीकृति अनिवार्य है। सरकार ने खुद पिछले वर्ष सुप्रीम कोर्ट से इजाजत मांगने के लिए अंतरिम आवेदन किया था।

कोर्ट ने पर्यावरण प्रभाव की जांच सीईसी से कराने का निर्णय दिया था। सीईसी ने नाइट सफारी को सैद्धांतिक अनुमति तो दे दी है, लेकिन इसके साथ कड़ी पर्यावरणीय और प्रशासनिक शर्तें भी जोड़ी हैं।

सरकार नाइट सफारी के लिए सीईसी की शर्तों को मानने के लिए तैयार है इसलिए माना जा रहा है कोर्ट शर्तों के साथ हरी झंडी दे देगा। नाइट सफारी को केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण (सीजेडए) सहित अन्य स्वीकृतियां पहले ही मिल चुकी हैं।

एनजीटी में भी चल रहा मामला सरकार के पक्ष में आ चुका है। ऐसे में इसे अंतिम बाधा के रूप में देखा जा रहा है। कोर्ट की हरी झंडी मिलते ही नाइट सफारी का काम शुरू होने की उम्मीद है।

सीईसी ने यह लगाई हैं शर्तें

  • नाइट सफारी में प्रस्तावित एडवेंचर जोन रद किया जाए
  • चार लेन सड़क पर रोक, दो लेन सड़कें ही बनाई जाएं
  • नवाब वाजिद अली शाह प्राणी उद्यान कुकरैल वन क्षेत्र में स्थानांतरित नहीं होगा
  • पर्यावरणीय निगरानी के लिए एक विशेष निगरानी समिति होगी गठित
  • यह समिति हर महीने निरीक्षण कर प्रत्येक तीन माह में राज्य सरकार, सीजेडए और सीईसी को रिपोर्ट सौंपेगी
  • परियोजना में कम से कम पेड़ों का कटान किया जाए
  • नाइट सफारी में तेज रोशनी और शोर-शराबे पर भी रहेगी रोक
  • ‘लो-इंटेंसिटी’, ‘एनिमल-फ्रेंडली लाइटिंग’, नियंत्रित वाहनों की आवाजाही और सीमित समय में रखा जाए प्रवेश
  • प्राकृतिक नालों, जलधाराओं और आर्द्रभूमि से किसी भी तरह की न की जाए छेड़छाड़
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