तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के बाद कांग्रेस के DMK छोड़ TVK को समर्थन देने के फैसले पर पार्टी में ही बवाल मच गया है। कांग्रेस नेता ही पार्टी के फैसले से नाराज हैं।
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद कांग्रेस ने द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) का साथ छोड़कर विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) को समर्थन देने का निर्णय किया है। पार्टी के इस फैसले पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मणिशंकर अय्यर ने नाराजगी जताई है।
मणिशंकर अय्यर ने आज शुक्रवार को कांग्रेस का TVK को समर्थन देने पर कहा, ‘इसमें घटिया राजनीतिक अवसरवादिता की बू आती है।’
TVK के हाथ मिलाने से भड़के मणिशंकर अय्यर
पीटीआई से बात करते हुए, कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर ने जोर देकर कहा, ‘इस कदम से द्रविड़ राज्य में सांप्रदायिक BJP की पिछले दरवाजे से एंट्री आसान हो जाती है तो यह राजनीतिक फुटबॉल के इतिहास में सबसे बुरा ऑन गोल (अपने ही पाले में गोल) साबित होगा।’
अय्यर ने कहा, ‘वह कल्पना भी नहीं कर सकते कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के संस्थापक ऐसी सुविधावादी राजनीति को आशीर्वाद देंगे।’
अय्यर ने कहा कि DMK के साथ चुनाव लड़ने के तुरंत बाद कांग्रेस का पाला बदलकर उसी TVK के साथ रिश्ता जोड़ना एक भयानक फैसला है, क्योंकि इसी TVK ने कुछ ही दिन पहले 23 विधानसभा सीटों पर हमें चुनौती दी थी, जिनमें हम हारे और 5 सीटों पर हम जीते थे।
अय्यर ने आगे कहा, ‘यह महात्मा गांधी के 1925 के इस सिद्धांत का एक अक्षम्य उल्लंघन है कि स्वराज एक ऐसी सरकार होनी चाहिए जो नैतिकता पर आधारित हो।’
DMK के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ा
‘द हिंदू तमिल’ में प्रकाशित एक लेख में, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने पूछा कि तमिलनाडु में कांग्रेस द्वारा अपने सहयोगी बदलने के इस कदम में चाणक्य की जीत हुई है या महात्मा गांधी की।
अय्यर ने तमिल लेख में लिखा, ‘कांग्रेस ने पांच सीटें जीतीं, लेकिन अपनी खुद की वजह से नहीं, बल्कि पूरी तरह से DMK के साथ अपने दशकों पुराने जूनियर पार्टनर के तौर पर गठबंधन की ताकत पर।’
अय्यर ने बताया, ‘असल में मेरा पूर्व संसदीय क्षेत्र मयिलादुथुराई DMK के नेतृत्व वाले गठबंधन का इतना मजबूत गढ़ साबित हुआ कि इसकी छह विधानसभा सीटों में से पांच सीटों पर मतदाताओं ने विजय की TVK के खिलाफ वोट दिया और गठबंधन के सदस्यों के पक्ष में मतदान किया।’
अय्यर ने आगे बताया, ‘इनमें से दो सीटें DMK को मिलीं, जबकि एक-एक सीट गठबंधन के सहयोगी दलों DMDK, IUML और कांग्रेस को मिली। इस तरह, जनादेश स्पष्ट रूप से DMK के नेतृत्व वाले गठबंधन के पक्ष में और नए आए दल के खिलाफ था।’
‘मैं कांग्रेस की ऐसी राजनीति को आशीर्वाद नहीं दे सकता’
अय्यर का मानना है, ‘पिछले 35 वर्षों से इस अनोखे संसदीय क्षेत्र के साथ मेरे जुड़ाव के संदर्भ में ही मैं यह लेख अत्यंत खेद और दुख के साथ लिख रहा हूं। यह देखते हुए कि पूरे राज्य का जनादेश पुरानी द्रविड़ पार्टियों के खिलाफ और सी. जोसेफ विजय की TVK के पक्ष में था।’
अय्यर ने आगे लिखा, ‘विजय पूरी तरह से धर्मनिरपेक्ष हैं और व्यापक द्रविड़ सहमति का हिस्सा हैं। फिर भी एक पुराने और आजमाए हुए साथी को अचानक छोड़ देना घटिया राजनीतिक अवसरवाद की बू देता है। लेकिन अवसरवाद ही चाणक्य की राजनीति का मूल तत्व है।’
मणिशंकर अय्यर ने कांग्रेस की आलोचना करते हुए लिखा, ‘यह गांधी की कांग्रेस की सत्य की राजनीति नहीं थी। मैं भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के संस्थापकों की ऐसी सुविधावादी राजनीति को आशीर्वाद देने की कल्पना भी नहीं कर सकता।’
अय्यर ने आगे लिखा, ‘इससे भी बढ़कर हमेशा यथार्थवादी रहने वाले जवाहरलाल नेहरू को भी इस बात पर संदेह होता कि क्या किसी आजमाए हुए और परखे हुए सहयोगी को छोड़ देना राजनीतिक रूप से समझदारी है। एक ऐसा सहयोगी जो दशकों की उथल-पुथल के दौरान हमारे साथ खड़ा रहा और उसकी जगह ऐसे साथी को अपनाना जिसे कांग्रेस ने 4 मई तक ठुकरा रखा था।





