खत्मुल कुरान के दिन मस्जिद कमेटी ने नजराना पेश कर हाफिजों का किया इस्तकबाल
महोबा। मुकद्दस माह रमजान के दो अशरे से ज्यादा बीत जाने के साथ अब मस्जिदों में चल रही तरावीह में कुरान मुकम्मल होने का भी सिलसिला भी तेज हो गया है। अलविंदा जुमा के दिन शहर की सर्राफा मस्जिद और अब्बा हुजूर की मस्जिद में हाफिजों ने तरावीह सुनाते हुए कुरान मुकम्मल किया। दोनो मस्जिदों में तरावीह पढ़ने वालों की खासी भीड़ रही, जिन्होंने हाफिजों के पीछे खड़े होकर 24 दिन तक कुरान को सुना। खत्मुल कुरान के दिन मस्जिद कमेटी ने नजराना पेश कर हाफिजों का इस्तकबाल किया।
शहर की सर्राफा बाजार की मस्जिद में भटीपुरा निवासी हाफिज सैयद समीर अली ने तरावीह सुनाते हुए कुरान मुकम्मल किया। खत्मुल कुरान के बाद हाफिज को लोगों ने फूलमाला पहनाई साथ ही उनसे मुसाफा कर उन्हें नजराना भी दिया। वहीं मस्जिद कमेटी ने हाफिज को 51786 रुपये, एक जोड़ा कपड़ा व अन्य सामान देकर तरावीह खत्म होने की मुबारकबाद दी। इस मौके पर आलिम जमालुद्दीन ने खिताब करते हुए कहा कि कुरान किसी मुसन्निफ (राइटर) ने नहीं लिखा है।
कुरान आल्लाह ताअला ने इसी मुकद्दस माह में नाजिल किया था, इसलिए इसे आसमानी किताब भी कहा जाता है। उन्होंने कहा कि इस माह में एक कुरान पढ़ने से सत्तर कुरान का सवाब मिलता है। हर नेकी पर सत्तर सत्तर गुना सवाब मिलता है। इस मौके पर मुतब्बली हाजी जफर उल्ला, अशरफ खान, हाजी मजूंर, मल्लन रजा सहित तमाम लोग मौजूद रहे।
उधर समदनगर स्थित बाबा हुजूर मजार की मस्जिद में हाफिज कारी मुअज्जम ने रमजान के चांद रात से तरावीह शुरू की और 23वें रोजे को कुरान मुकम्मल किया। हाफिज ने फातिहा के बाद मुल्क की तरक्की की दुआएं की गई। खत्मुल कुरान के बाद तकरीर हुई, जिसमें हाफिज ने कहा कि इस मुबारक माह की बेइंतहा फजीलत है, इस महीने में हर घर में बरकत बढ़ जाती है। अल्लाह ताअला अपने बंदें के गुनाह माफ कर देता है और रोजेदार की हर जायज मुराद को पूरी करता है। तरावीह के अखिरी दिन हाफिज को मस्जिद कमेटी ने नजराना पेश किया और सभी लोगों को तबर्रूख तक्सीम किया गया।





