बढ़नी सिद्धार्थनगर। बोतल बंद पानी को अक्सर सुरक्षित माना जाता है, लेकिन यह पूरी तरह से पीने योग्य या स्वास्थ्यवर्धक नहीं हो सकता है। सूत्रों से मिली जानकारी अनुसार बताया जाता है कि प्लास्टिक की बोतलों से हानिकारक रसायन, भारी धातुएं (जैसे एंटीमनी) और माइक्रोप्लास्टिक पानी में मिल सकते हैं, जो हार्मोन को प्रभावित कर सकते हैं। लंबे समय तक भंडारण से भी पानी की गुणवत्ता खराब हो सकती है।
जबकि बोतल बंद पानी आज कल शादी विवाह आदि किसी भी पार्टी कार्यक्रम के दौरान अक्सर देखने को मिलता है, जो एक फैशन बन गया है। बोतल बंद पानी की भारी डिमांड होने से ज्यादातर होटल व छोटी-छोटी दुकानों पर तमाम तरह ब्रांडेड नामों से मिलता जुलता घटिया क्वालिटी का पानी बोतल बिक रहा है। जो लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा असर डाल रहा है। लेकिन लोगों को इसके पीछे की वजह का पता नहीं चल पा रहा है।
बताते चलें अभी कुछ दिनों पहले एफएसडीए ने बोतल बंद पानी की 39 कंपनियों के खिलाफ बड़ा ऐक्शन लिया है। इस कंपनियों के बोतल बंद पानी की बिक्री और सप्लाई पर रोक लगा दी है। इस बड़ी कार्रवाई के बाद कंपनियोंं से जुड़े लोगों में हड़कंप मचा हुआ है। बताया जा रहा है कि नमूनों की जांच में पानी पीने योग्य नहीं पाया गया है। उत्तर प्रदेश में खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग (एफएसडीए) ने बोतल बंद पानी की 39 कंपनियों के विरुद्ध कार्रवाई करते हुए उनके बोतल बंद पानी की बिक्री और सप्लाई पर रोक लगा दी है। इस बड़ी कार्रवाई के बाद इन कंपनियोंं से जुड़े लोगों में हड़कंप मचा हुआ है।
बताया जाता है कि नमूनों की जांच में पानी पीने योग्य नहीं पाया गया है। इसका उपयोग लोगों के स्वास्थ्य पर गहरा प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। एफएसडीए ने मिनरल वाटर, पैक्ड ड्रिंकिंग वाटर और गैर एल्कोहलिक पेय पदार्थ में गड़बड़ी की शिकायतों पर विभिन्न जिलों में अभियान चलाया था। लेकिन बढ़नी क्षेत्र में इस अभियान का कोई असर नही दिख रहा है। यहां धड़ल्ले से तमाम कंपनियों के घटिया क्वालिटी की बंद बोतलें पानी बिक रही है। लेकिन विभाग के लोग इस चीज से अंजान बने हुए हैं। स्थानीय लोगों ने ऐसे डीलर और दुकानदारों के खिलाफ अभियान चलाकर कार्रवाई की मांग की है।





