सुल्तानपुर। साइबर अपराधियों के हौसले इतने बुलंद हो चुके हैं कि अब उन्होंने जनप्रतिनिधियों को भी निशाना बनाना शुरू कर दिया है। ताजा मामला सुल्तानपुर-अमेठी क्षेत्र से भाजपा एमएलसी शैलेंद्र सिंह से जुड़ा है, जिन्हें साइबर ठगों ने करीब डेढ़ घंटे तक ‘डिजिटल अरेस्ट’ करने की कोशिश की। हालांकि एमएलसी की सतर्कता और सूझबूझ के चलते ठग अपने मंसूबों में कामयाब नहीं हो सके।
एमएलसी शैलेंद्र सिंह के अनुसार उन्हें एक अज्ञात नंबर से कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को मुंबई पुलिस और एटीएस का अधिकारी बताते हुए कहा कि उनके नाम पर केनरा बैंक में एक फर्जी खाता खोला गया है। ठगों ने आरोप लगाया कि इस खाते का इस्तेमाल मनी लॉन्ड्रिंग और संदिग्ध लेनदेन के लिए किया जा रहा है।
ठगों ने मामले को गंभीर बताते हुए एमएलसी को वीडियो कॉल पर जोड़ लिया और उनसे पूछताछ के नाम पर दबाव बनाना शुरू कर दिया। उन्होंने एमएलसी को निर्देश दिया कि वे तुरंत घर के एक कमरे में चले जाएं, दरवाजा अंदर से बंद कर लें और किसी से भी बातचीत न करें।
करीब डेढ़ घंटे तक ठग उन्हें वीडियो कॉल पर रखकर आधार कार्ड और बैंक से जुड़ी जानकारी मांगते रहे। इस दौरान जब कमरे का दरवाजा हल्का सा खुला तो ठग भड़क गए और बोले आप मजाक कर रहे हैं क्या? दरवाजा किसने खोला? किसी को अंदर मत आने दीजिए। ठग लगातार मनोवैज्ञानिक दबाव बनाकर एमएलसी को डराने की कोशिश करते रहे।
इसी बीच एमएलसी के करीबियों को कॉल पर शक हुआ तो उन्होंने उस नंबर की पड़ताल की। जांच में पता चला कि जिस नंबर से कॉल आ रहा था वह मुंबई एटीएस का नहीं बल्कि मध्य प्रदेश के सतना की एक महिला के नाम पर पंजीकृत है। जैसे ही ठगों को अपनी पोल खुलने का अंदेशा हुआ उन्होंने तुरंत कॉल काट दी। घटना के बाद एमएलसी शैलेंद्र सिंह ने सुल्तानपुर के साइबर थाने में मामले की तहरीर दी है।
साइबर थाना प्रभारी अखंडदेव मिश्रा ने बताया कि ठगों ने एमएलसी को ‘डिजिटल अरेस्ट’ करने की कोशिश की थी। तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और जिन नंबरों व आईपी एड्रेस से कॉल की गई थी, उन्हें ट्रैक किया जा रहा है। साइबर पुलिस ने लोगों से अपील की है कि कोई भी पुलिस या एजेंसी फोन या वीडियो कॉल पर किसी को ‘डिजिटल अरेस्ट’ नहीं करती। ऐसे कॉल आने पर घबराने के बजाय तुरंत कॉल काटें और पुलिस को सूचना दें।





