अम्बेडकरनगर। जनपद के विकासखंड बसखारी में ब्लॉक प्रमुख निधि को लेकर चल रहे कथित भ्रष्टाचार के चर्चे अभी थमे भी नहीं थे कि अब विकासखंड टांडा का मामला सुर्खियों में आ गया है। टांडा ब्लॉक में विकास कार्यों से जुड़े बिल-वाउचर जिस तरीके से अपलोड किए गए हैं, उसे लेकर आमजन में तरह-तरह की चर्चाएँ शुरू हो गई हैं। लोगों का कहना है कि कागज़ी कार्यवाही ऐसी दिखाई जा रही है मानो “आसमान से एलियन उतर आए हों” — यानी दस्तावेज़ वास्तविकता से मेल नहीं खाते।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि अपलोड किए गए बिलों की शैली, रकम और विवरण इतने संदिग्ध प्रतीत हो रहे हैं कि “आँखों देखी मक्खी निगलने” जैसा हाल है — सब कुछ सामने दिख रहा है, फिर भी कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिल रहा। कई ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि यदि कार्य वास्तव में हुए हैं तो पारदर्शिता से उनका भौतिक सत्यापन क्यों नहीं कराया जा रहा।
जनता के बीच चर्चा है कि “जहाँ धुआँ उठता है, वहाँ आग भी होती है।” उनका कहना है कि यदि सब कुछ नियमों के अनुसार है तो संबंधित विभाग को खुलकर स्पष्टीकरण देना चाहिए, ताकि शंकाओं का समाधान हो सके। वहीं कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि मामले की स्वतंत्र जांच कराई जाए, जिससे सच सामने आए और यदि कोई अनियमितता हुई है तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई हो। फिलहाल यह मुद्दा क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है और लोग प्रशासन की प्रतिक्रिया का इंतजार कर रहे हैं।





