सिद्धार्थनगर की विशेष पॉक्सो अदालत ने सामूहिक दुष्कर्म के मामले में फैसला सुनाया है। नाबालिग पीड़िता के सगे मामा और उसके साथी को शेष प्राकृतिक जीवन तक आजीवन कारावास और 75-75 हजार रुपये अर्थदंड की सजा दी गई है। यह घटना 16 जून 2019 को बांसी कोतवाली क्षेत्र में हुई थी, जब मामा ने नाबालिग को शराब पिलाकर दुष्कर्म किया था।
सिद्धार्थनगर। विशेष न्यायाधीश पाक्सो एक्ट वीरेंद्र कुमार की न्यायालय ने मंगलवार को सामूहिक दुष्कर्म के मामले में निर्णय सुनाया।
दो आरोपितों को दोषसिद्ध पाते हुए शेष प्राकृत जीवन तक का आजीवन कारावास और प्रत्येक को 75-75 हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया। अभियुक्तों में एक का नाम बांसी कोतवाली क्षेत्र निवासी अशर्फी व नारायण है। मुख्य अभियुक्त रिश्ते में नाबालिग पीड़िता सगा मामा है।
विशेष न्यायाधीश पाक्सो एक्ट की न्यायालय में विशेष लोक अभियोजक पाक्सो एक्ट पवन कुमार कर पाठक ने पीड़िता का पक्ष रखा। न्यायालय में कहा कि पथरा बाजार थाना के एक गांव निवासी नाबालिग की मां ने 17 जून 2019 को बांसी कोतवाली में तहरीर दी थी।
आरोप लगाया था कि 10 जून 2019 को नाबालिग पुत्री बांसी के एक मोहल्ला स्थित ननिहाल में सिलाई सीखने के लिए गई थी। 16 जून 2019 को अभियुक्त सगे मामा ने कपड़ा दिलाने के लिए बाइक से अपने साथ ले गए।
बाइक से बस्ती और रुधौली तक गए। रास्ते में बीयर पिया और नाबालिग को भी जबरदस्ती पिलाया। जब वह नशे की स्थिति में हो गई तो वापस लौट आए। बांसी नगर पालिका के एक मोहल्ला स्थित इंटर कालेज के पास खंडहर में मामा और उसके साथी ने सामूहिक दुष्कर्म किया।
इसके बाद रात करीब 12 बजे गांव में छोड़ कर फरार हो गए। न्यायालय ने गवाहों के बयान और साक्ष्य के आधार पर दोनों अभियुक्त को दोषसिद्ध पाते हुए आजीवन कारावास और अर्थदंड की सजा सुनाई।





