India US Trade Deal: भारत और अमेरिका ने एक अंतरिम व्यापार समझौते को अंतिम रूप दिया है, जिससे भारतीय सामानों पर अमेरिकी टैरिफ 25% से घटकर 18% हो गया है। यह समझौता रूस से तेल खरीद पर लगे अतिरिक्त शुल्क को हटाता है। इसके तहत कई भारतीय उत्पाद शुल्क-मुक्त अमेरिका में प्रवेश कर सकेंगे। भारत अमेरिकी सामानों के लिए बाधाएं कम करेगा और अगले पांच वर्षों में 500 बिलियन डॉलर के अमेरिकी उत्पाद खरीदेगा, जिससे दोनों देशों को लाभ होगा।
अमेरिका और भारत ने एक अंतरिम ट्रेड एग्रीमेंट को फाइनल (India US Trade Deal) कर दिया है, जिसके तहत भारतीय सामानों पर अमेरिकी टैरिफ को घटाकर 18 परसेंट कर दिया गया है। इस डील के तहत, अमेरिका ने भारतीय इंपोर्ट पर लगाया गया 25 परसेंट का एक्स्ट्रा टैक्स हटा लिया है। यह 25 फीसदी का टैरिफ रूस से तेल खरीदारी को लेकर लगाया गया था। अब ट्रेड एग्रीमेंट के तहत इसे हटा दिया गया है।
भारत और अमेरिका ने शनिवार 7 फरवरी को घोषणा की कि वे आपसी और फायदेमंद व्यापार के बारे में एक अंतरिम समझौते के लिए एक फ्रेमवर्क पर सहमत हो गए हैं।
वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने भारत-अमेरिका संयुक्त बयान जारी किया, जिसमें कहा गया है कि यह फ्रेमवर्क पिछले साल 13 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा शुरू की गई व्यापक अमेरिका-भारत द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) बातचीत के प्रति दोनों देशों की प्रतिबद्धता की पुष्टि करता है, जिसमें अतिरिक्त बाजार पहुंच प्रतिबद्धताएं शामिल होंगी और अधिक मजबूत सप्लाई चेन को समर्थन मिलेगा।
आइए इस डील की 10 प्रमुख बातें जानते हैं।
India US Trade Deal को 10 प्वाइंट में समझें
- अमेरिका भारतीय सामानों पर 18 प्रतिशत का रेसिप्रोकल टैरिफ लगाएगा, जिसमें होम डेकोर, चमड़ा और जूते, कपड़े, प्लास्टिक और रबर, हस्तशिल्प उत्पाद, कपड़ा, ऑर्गेनिक रसायन और चुनिंदा मशीनरी जैसे सेक्टर शामिल हैं।
- एक बार जब अंतरिम समझौता फाइनल हो जाएगा, तो कई भारतीय सामान बिना टैरिफ के अमेरिका में प्रवेश कर सकेंगे। इसमें रत्न और हीरे, जेनेरिक दवाएं और विमान के पुर्जे शामिल हैं।
- यह फ्रेमवर्क स्टील, एल्यूमीनियम और तांबे पर राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित घोषणाओं के तहत लगाए गए कुछ भारतीय विमानों और विमान के पुर्जों पर अमेरिकी टैरिफ को हटाने का प्रावधान करता है।
- केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भरोसा दिलाया कि यह समझौता भारतीय किसानों के हितों की रक्षा करता है और मक्का, गेहूं, चावल, सोया, पोल्ट्री, दूध, पनीर, इथेनॉल (ईंधन), तंबाकू, कुछ सब्जियों और मांस सहित संवेदनशील कृषि और डेयरी उत्पादों को पूरी तरह से सुरक्षित रखकर ग्रामीण आजीविका को सपोर्ट करता है।
- व्हाइट हाउस ने दावा किया है कि भारत रूसी तेल का इंपोर्ट बंद कर देगा, अमेरिकी एनर्जी प्रोडक्ट खरीदेगा और अगले 10 सालों में अमेरिका के साथ डिफेंस कोऑपरेशन बढ़ाएगा। भारत ने अभी तक इस दावे पर कोई जवाब नहीं दिया है और कहा है कि एनर्जी सिक्योरिटी सुनिश्चित करना हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकता है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक बयान में कहा, “ऑब्जेक्टिव मार्केट की स्थितियों और बदलते इंटरनेशनल हालात के हिसाब से अपने एनर्जी सोर्स को डाइवर्सिफाई करना, इसे सुनिश्चित करने की हमारी रणनीति का मुख्य हिस्सा है।”
- भारत ने अमेरिकी सामान जैसे मेडिकल डिवाइस, ICT उत्पाद और खाद्य और कृषि उत्पादों के सामने आने वाली लंबे समय से चली आ रही बाधाओं को कम करने पर सहमति व्यक्त की है। यह छह महीने के भीतर इन सेक्टरों में अमेरिकी या अंतरराष्ट्रीय मानकों की भी समीक्षा करेगा।
- दोनों पक्ष यह सुनिश्चित करने के लिए स्पष्ट नियम बनाएंगे कि व्यापार का लाभ मुख्य रूप से भारत और अमेरिका को मिले, न कि तीसरे देशों को जो उनके माध्यम से सामान भेजते हैं।
- दोनों देश सप्लाई चेन पर अधिक बारीकी से काम करेंगे, संवेदनशील निवेश की जांच करेंगे, निर्यात नियंत्रण को कड़ा करेंगे और अन्य देशों द्वारा अनुचित व्यापार प्रथाओं से निपटेंगे।
- भारत अगले पांच वर्षों में लगभग 500 बिलियन अमेरिकी डॉलर के अमेरिकी सामान खरीदने की योजना बना रहा है, जिसमें ऊर्जा, प्रौद्योगिकी उत्पाद, विमान और विमान के पुर्जे, कीमती धातुएं और कोकिंग कोयला शामिल हैं।
- भारत और अमेरिका प्रौद्योगिकी उत्पादों, जैसे डेटा केंद्रों में उपयोग किए जाने वाले उपकरणों में भी व्यापार बढ़ाएंगे, और BTA के तहत स्पष्ट डिजिटल व्यापार नियम बनाने का लक्ष्य रखेंगे।





