कोई हसरत न कोई आस बाकी है…
इटावा। इकबाल मेमोरियल एजूकेशनल सोसायटी के तत्वावधान में गणतंत्र दिवस के मौके पर साबित गंज स्थित इकबाल मेमोरियल स्कूल में मुशायरा व कवि सम्मेलन का आयोजन सैयद हाशिम नईमी की अध्यक्षता किया गया,जिसका शुभारंभ मुख्य अतिथि पूर्व मंत्री अशोक यादव ने शमा रोशन कर किया।
संयोजक मो.इनाम उल्ला बबलू,नदीम अहमद एड.,सह संयोजक मो.शाहिद खान,कमेटी के सदस्य नोमान अहमद खान,मो.फैसल,मो.नईम ने मुख्य अतिथि सहित अतिथियों का शाल उढ़ाकर स्वगात किया।मुशायरा व कवि सम्मेलन में कलाम पेश करते हुये पूर्व मंत्री कवि अशोक यादव ने कहा कोई हसरत न कोई आस बाकी है फिर भी जीने की प्यास बाकी है,कौन अपना है कौन बेगाना इतना होशो हवास बाकी है।
संचालन करते हुए शायर इंतखाब आलम रौनक इटावी ने कहा मस्ती में यूं आज तिरंगा लगता है अम्बर को छू लेगा ऐसा लगता है,रंग बिरंगे फूल यहां पर खिलते हैं मुल्क हमारा एक गुलदस्ता लगता है। नदीम अहमद एडवोकेट ने कहा रस्मे उल्फत को हरेक तौर निभाया जाए चलिए धोखा ही सही प्यार में खाया जाए, सूरते हाल बदलने की यही सूरत है आईना खुद को किसी रोज दिखाया जाए।आरिफ सिद्दीकी नृर ने कहा अपना पैगाम है सभी के लिये,वक्त रुकता नही किसी के लिए।आमिर हुसैन आमिर ने कहा गर साथ सभी हिन्दू मुसलमा न होते,पूरे कभी आजादी के अरमान न होते।
कवि आलोक अर्श ने कहा शहादत पर अभी भी फख्र का एहसास जिंदा है, ये भारत है शहीदों का यहां इतिहास जिंदा है।शायर यासीन अंसारी ने कहा खत्म नफरत हो दोस्ती हो जाए,खुशनुमा अब तो जिंदगी हो जाये।रियाज इटावी ने कहा लहू से सींचा है गुलशन इसे आबाद रखना है,शहीदों की शहादत को हमेशा याद रखना है।
शकील अहमद सागर ने कहा वतन पे खुद को मिटाओ तो कोई बात बने,शमा लहू से जलाओ तो कोई बात बने।इसके अलावा हाशिम नईमी, साबिर इटावी,अनिल दीक्षित,इमरान अंसारी,मंजू यादव,वैभव यादव,अमित प्रजापति,शोएब अली एड.ने भी शानदार कलाम पेश कर ख़ूब वाह वाही लूटी।
इस अवसर पर पूर्व सभासद मो.इस्लाम चीटम,वसीम चौधरी,इम्तियाज अहमद एड.,फरहान शकील,मो.राशिद,सभासद इरफान अहमद,इकबाल अंसारी,शरद बाजपेई,हाजी गुड्डू मंसूरी,रिजवान क़ुरैशी,इफ्तिखार मिर्जा,शावेज़ नक़वी, निहाल खान,असलम अंसारी,मो.शाहिद लल्ला सहित बड़ी संख्या में श्रोताओं ने भाग लिया।अंत में संयोजक इनाम उल्ला बब्लू ने अतिथियों,शायरों,कवियों व श्रोताओं का आभार व्यक्त किया।





