Wednesday, February 11, 2026
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ईरान अब निशाने पर खड़ा मुल्क नहीं, बल्कि मोर्चा तय करने वाली ताक़त है

आलम रिज़वी

मध्य-पूर्व में जो कुछ घटित हो रहा है, उसे केवल “तनाव” कह देना हक़ीक़त से आँख चुराने जैसा होगा। इराक़ में शिया लड़ाकों की जनरल मोबिलाइज़ेशन दरअसल एक साफ़ ऐलान है—

कि ईरान अब घिरा हुआ, डरा हुआ या प्रतिक्रियात्मक राष्ट्र नहीं रहा।

आज वह एक ऐसे रणनीतिक मोर्चे का नेतृत्व कर रहा है, जो किसी भी आक्रामक ताक़त को कई दिशाओं से जवाब देने की क्षमता रखता है।

इराक़ के शिया सशस्त्र गुट—काताइब हिज़्बुल्लाह, असाइब अहल-अल-हक़, हरकत अल-नुजाबा और बद्र ऑर्गनाइज़ेशन—को अलर्ट पर रखना कोई स्थानीय फ़ैसला नहीं, बल्कि क्षेत्रीय शक्ति संतुलन का खुला प्रदर्शन है। ये वही ताक़तें हैं जिन्होंने आईएसआईएस को मैदान में शिकस्त दी और आज इराक़ की ज़मीनी हक़ीक़त को नियंत्रित करने की क्षमता रखती हैं।

भ्रम टूट चुका है

पश्चिम और उसके सहयोगी दशकों से इस भ्रम में रहे कि प्रतिबंध, धमकी और सैन्य दबाव ईरान को घुटनों पर ला देंगे। लेकिन आज की सच्चाई यह है कि ईरान की मिसाइल और ड्रोन क्षमता पहले से कहीं ज़्यादा सटीक और घातक है

उसके सहयोगी केवल नारे लगाने वाले समूह नहीं, बल्कि युद्ध-परीक्षित संगठन हैं

संघर्ष अब एक मोर्चे तक सीमित नहीं रहा

यही कारण है कि आज किसी भी हमले की क़ीमत केवल तेहरान नहीं, बल्कि पूरा मध्य-पूर्व चुकाएगा।

Axis of Resistance:

एक विचार, एक ताक़त

ईरान, इराक़, लेबनान, यमन और फ़िलिस्तीन में उभरती यह धुरी केवल हथियारों का गठजोड़ नहीं है। यह उस विचार की अभिव्यक्ति है जो कहता है:

ज़ुल्म का जवाब सिर्फ़ बयान से नहीं, ताक़त से दिया जाएगा।

इराक़ में मोबिलाइज़ेशन इस बात का सबूत है कि यह धुरी अब रक्षात्मक मोड से बाहर निकल चुकी है।

अब रणनीति स्पष्ट है—

अगर हमला होगा, तो जवाब सीमित नहीं होगा।

इराक़: जंग का नहीं, जवाब का मैदान

इराक़ की भौगोलिक और सामरिक स्थिति इसे निर्णायक बनाती है। यहां अमेरिकी सैन्य ठिकानों की मौजूदगी और शिया बहुल क्षेत्रों में संगठित ताक़त—दोनों मिलकर यह संदेश देते हैं कि अब इराक़ सिर्फ़ दर्शक नहीं रहेगा।

यह साफ़ संकेत है कि:

ईरान पर दबाव डालने का हर प्रयास,

पूरे क्षेत्र को अस्थिर करने की क़ीमत पर ही संभव होगा।

आज ईरान किसी की रहम पर नहीं खड़ा है।

वह अकेला नहीं है।

वह कमज़ोर नहीं है।

इराक़ में शिया लड़ाकों की जनरल मोबिलाइज़ेशन इस सच्चाई की घोषणा है कि मध्य-पूर्व में ताक़त का संतुलन बदल चुका है, और जो इसे नज़रअंदाज़ करेगा, वह भारी ग़लतफ़हमी में रहेगा।

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