सरकार खाद बिक्री को व्यवस्थित करने के लिए डिजिटल फार्मर आईडी का उपयोग करने की योजना बना रही है। यह आईडी PM Kisan Yojana के लिए भी इस्तेमाल होती है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सब्सिडी का लाभ सही किसानों तक पहुंचे। पायलट प्रोजेक्ट के तहत यूरिया बिक्री को एग्री स्टैक से जोड़ा जाएगा। 7.67 करोड़ से अधिक किसान आईडी बन चुकी हैं, जिससे खेती में पारदर्शिता आएगी।
सरकार खाद बिक्री को व्यवस्थित करने के लिए बड़ी तैयार कर रही है। सरकार खाद बेचने के प्रोसेस को आसान और व्यवस्थित बनाने के लिए डीजीटल फार्मर आईडी का इस्तेमाल कर सकती है। ये वही डिजिटल फार्मल आईडी है जिसका इस्तेमाल नए किसान PM Kisan Yojana का रजिस्ट्रेशन करने के लिए करते हैं। कुछ राज्यों में पीएम किसान योजना का लाभ लेने के लिए Kisan Farmer ID को जरूरी कर दिया गया है।
सरकार तेजी के साथ किसान आईडी बनाने पर काम कर रही है। यह किसानों की एक यूनिक आइडेंटिटी डॉक्यूमेंट (ID) है जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि किसी योजना का लाभ सही किसान तक जा रहा है या नहीं।
यूरिया सब्सिडी का बोझ बढ़ सकता है?
सूत्रों ने बताया कि सरकार इस कदम को पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर चला रहा है। अभी सरकार फर्टिलाइजर सब्सिडी पर बहुत सब्सिडी देती है उसे तर्कसंगत बनाने के लिए यह कदम उठाया जा सकता है। सरकार का बजट में फर्टिलाइजर सब्सिडी पर खर्च होने का अनुमान ₹1.68 ट्रिलियन है, जो ₹1.91 ट्रिलियन को पार कर सकता है।
बजट अनुमानों से ज्यादा खर्च होने का मुख्य कारण FY26 में यूरिया की रिकॉर्ड खपत है, जो अप्रैल से दिसंबर 2025 के बीच पहले ही 31.15 मिलियन टन (mt) तक पहुंच चुकी है, जो 2024 की इसी अवधि की तुलना में लगभग 4 प्रतिशत ज्यादा है।
अधिकारियों ने बताया कि केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने पिछले महीने राज्य सरकार के प्रतिनिधियों के साथ एक मीटिंग में, कुछ चुनिंदा जिलों में पायलट प्रोजेक्ट के साथ शुरू करके, यूरिया की बिक्री को एग्री स्टैक के साथ धीरे-धीरे इंटीग्रेट करने का विचार पेश किया था।
पहले फेज में, सात जिलों में पायलट प्रोजेक्ट चलाए जाएंगे, जहां पहले से ही काफी ज्यादा किसान ID बन चुकी हैं। इस फेज के दौरान, यह पक्का करने के लिए किसान ID का इस्तेमाल किया जाएगा कि खाद सिर्फ जमीन के मालिक, खेती करने वाले या उनके द्वारा अधिकृत व्यक्ति को ही बेची जाए।
कैसे बनती है फार्मर आईडी? How to create a farmer ID?
किसान ID बनाने के लिए, आम तौर पर अपने राज्य के पोर्टल (जैसे PM-KISAN या Agri Stack) के जरिए ऑनलाइन रजिस्टर करें, eKYC के लिए आधार दें, जमीन सर्वे नंबर सहित खेत की डिटेल्स डालें, डेटा इस्तेमाल के लिए सहमति दें, ई-साइन करें, और अप्रूवल ट्रैक करने के लिए एनरोलमेंट ID पाने के लिए सबमिट करें, वेरिफिकेशन के बाद सरकारी योजनाओं का फायदा उठाने के लिए ID जेनरेट हो जाएगी।

आप CSC पर जाकर भी फार्मर आईडी बनवा सकते हैं। अगर आप खुद से बनाना चाहते हैं तो आप अपने राज्य के पोर्टल या फिर फार्मर रजिस्ट्री ऐप के जरिए रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं।
इतने किसानों की बन चुकी ID?
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 4 दिसंबर, 2025 तक देश में लगभग 7.67 करोड़ किसान ID या किसानों की डिजिटल पहचान बनाई जा चुकी है। ये ID डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन के तहत किसानों की डेमोग्राफिक प्रोफाइल, जमीन की जानकारी और खेती के तरीकों को रिकॉर्ड करती हैं।
क्या है एग्री स्टैक प्लेटफॉर्म?
सरकार एग्री स्टैक प्लेटफॉर्म के जरिए यूरिया की बिक्री को धीरे-धीरे इंटीग्रेट करने की योजना पर काम कर रही है। बहुत से लोगों के मन में एक सवाल जरूर आया होगा कि आखिर यह एग्री स्टैक प्लेटफॉर्म क्या है?
एग्री स्टैक सरकार द्वारा बनाया जा रहा एक डिजिटल फाउंडेशन है, जिसका मकसद भारत में खेती को बेहतर बनाने के लिए अलग-अलग स्टेकहोल्डर्स को एक साथ लाना और डेटा और डिजिटल सर्विसेज का इस्तेमाल करके किसानों के लिए बेहतर नतीजे और परिणाम देना है।





