10 minute delivery stopped: सरकार के हस्तक्षेप के बाद स्विगी और जेप्टो ने ’10-मिनट डिलीवरी’ का प्रचार बंद कर दिया है, अपनी ब्रांडिंग में बदलाव किया है। डेटा से पता चलता है कि डिलीवरी बॉय पर लापरवाही और कम वेतन का डर इस $11.5 बिलियन के सेक्टर को परेशान कर रहा है। विशेषज्ञों ने इसे ‘दिखावा’ बताया, क्योंकि क्विक कॉमर्स अभी भी गति और सुविधा पर निर्भर है। श्रम मंत्रालय ने कंपनियों से यह प्रचार रोकने को कहा था।
क्विक कामर्स कंपनियों स्विगी और जेप्टो (Swiggy and Zomato) ने भी भारत सरकार के हस्तक्षेप के बाद अपने ”10-मिनट” (10 minute delivery stopped) में डिलीवरी के दावे का प्रचार बंद कर दिया है और अपनी ब्रांडिंग बदल दी है। दोनों कंपनियों के एप से बुधवार को इसका पता चला।
डेटम इंटेलिजेंस के डेटा से पता चलता है कि डिलीवरी ब्वाय द्वारा लापरवाही से गाड़ी चलाने और 10-मिनट के भीतर आर्डर पूरा नहीं करने पर कम वेतन मिलने का डर तथाकथित ”क्विक कामर्स” सेक्टर को परेशान कर रहा है, जो वर्तमान में लगभग 11.5 अरब डॉलर का है।
‘टैगलाइन हटाना काफी हद तक दिखावा’
एलारा कैपिटल के कार्यकारी उपाध्यक्ष करण तौरानी ने कहा, ”10-मिनट डिलीवरी की टैगलाइन हटाना काफी हद तक दिखावे के लिए है, न कि कारोबार में बदलाव लाने के लिए। क्विक कामर्स अभी भी रफ्तार, सुविधा और आस-पास से डिलीवरी पर आधारित है, जो ढांचागत रूप से हारिजान्टल ई-कामर्स (एक ही ई-प्लेटफार्म पर कई सारी वस्तुओं की उपलब्धता) की टाइमलाइन से बेहतर है।”
ब्लिंकिट के बिजनेस मॉडल में कोई बदलाव नहीं
ब्लिंकिट ने मंगलवार को बाद में यह भी स्पष्ट किया कि उसके क्विक कामर्स प्लेटफार्म के बिजनेस मॉडल में कोई बदलाव नहीं हुआ है। सूत्रों ने मंगलवार को बताया था कि श्रम मंत्रालय ने शनिवार को तीनों कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ बंद कमरे में हुई बैठक में यह मुद्दा उठाया था और उनसे बिजनेस को 10-मिनट की सेवा के रूप में प्रचारित करना बंद करने को कहा था।





