Thursday, January 22, 2026
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कहीं आप भी तो नहीं कर रहे ये गलती? दवाओं के साइड इफेक्ट्स पर विशेषज्ञों की चेतावनी

संजय गांधी स्नातकोत्तर चिकित्सा विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआइ) के एक नए अध्ययन के अनुसार, एंटी माइक्रोबियल, एंटी वायरल, एंटी फंगल, एंटीबायोटिक, टीबी और कैंसर की दवाइयों का सबसे अधिक दुष्प्रभाव देखा गया है। आइए प्रो. आर. हर्षवर्धन (एसजीपीजीआइ) से जानें किसी दवा के प्रयोग में किन बातों का रखें ध्यान।

दवाइयां कई बीमारियों से राहत दे सकती हैं तो हो सकते हैं इसके साइड इफेक्ट यानी दुष्प्रभाव भी संजय गांधी स्नातकोत्तर विज्ञान चिकित्सा संस्थान के एसजीपीजीआइ अस्पताल प्रशासन विभाग लखनऊ की एडवर्स ड्रग रिएक्शन (दवा से होने वाले कुप्रभाव) निगरानी इकाई द्वारा किए गए एक अध्ययन में ऐसी कई बातें सामने आई हैं।

शोध टीम में शामिल डॉ. शालिनी त्रिवेदी के के अनुसार, अनुसार, माइक्रोबियल, टीवी और कैंसर की दवाएं देते समय मरीजों की निगरानी आवश्यक है ताकि इन दुष्प्रभावों को समय रहते पहचाना जा सके और इलाज को सुरक्षित बनाया जा सके।

बता दें कि यह शोध वर्ष 2024 (जनवरी से दिसंबर) के दौरान संस्थान की एडवर्स ड्रग रिएक्शन निगरानी इकाई में दर्ज मामलों के विश्लेषण पर आधारित है । अध्ययन में कुल 213 एडवर्स ड्रग रिएक्शन के मामले दर्ज किए गए। इनमें से 155 मामले एसजीपीजीआइ के विभिन्न विभागों से सामने आए, जबकि शेष मामले प्रदेश के अन्य चिकित्सा केंद्रों से रिपोर्ट किए गए। यह

शोध एडवर्स ड्रग रिएक्शन

ए रेट्रोस्पेक्टिव आब्जर्वेशनल स्टडी विषय पर किया गया। शोध दल में प्रो. आर. हर्षवर्धन (चिकित्सा अधीक्षक एवं प्रोफेसर ), डॉ. सौरभ सिंह, डॉ. शालिनी त्रिवेदी, डॉ. अमोल जैन, डॉ. वैष्णवी आनंद, डॉ. अक्षिता बंसल और डॉ. अंकित कुमार सिंह शामिल रहे।

युवाओं में बढ़ती जागरूकता

अध्ययन में यह भी सामने आया कि 20 से 30 वर्ष आयुवर्ग के मरीजों में दवाओं से होने वाले कुप्रभाव के मामले सबसे अधिक दर्ज किए गए। इसका प्रमुख कारण युवाओं में स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता मानी जा रही है, जो दवा लेने के बाद होने वाली परेशानी को तुरंत डाक्टरों या स्वास्थ्य कर्मियों को बताते हैं वहीं इससे अधिक आयु वर्ग के लोग कई बार दुष्प्रभाव को सामान्य समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, और एलर्जी को ध्यान में रखे बिना दवा देना जिससे स्थिति गंभीर हो सकती है। दुष्प्रभाव का बड़ा कारण है।

पाचन तंत्र पर दुष्यभाव

उक्त अध्ययन में यह भी पाया गया कि नसों के जरिये दी जाने वाली दवाइयों से कुप्रभाव की आशंका अधिक रहती है। 35 प्रतिशत मामलों में त्वचा और चमड़ी से जुड़ी समस्याएं जैसे रैशेज, खुजली और एलर्जी सामने आईं, जबकि लगभग 30 प्रतिशत मामलों में पेट और पाचन तंत्र से जुड़ी परेशानियां जैसे उल्टी, दस्त और पेट दर्द दर्ज किए गए।

दुष्प्रभाव के सामान्य कारण

उम्र, वजन, किडनी – लिवर की कार्यक्षमता, पुरानी बीमारियों और एलर्जी को ध्यान रखे बिना दवा देना दुष्प्रभाव का बड़ा कारण है। हर दवा की खुराक तय होती है। इससे अधिक खुराक लेने पर उल्टी, चक्कर, सुस्ती, ब्लड प्रेशर गिरना, किडनी या लिवर पर असर जैसे दुष्प्रभाव हो सकते हैं। कई मरीज एक साथ कई दवाएं लेते हैं या अलग-अलग डाक्टरों से इलाज कराते हैं। इससे भी दवाओं के बीच प्रतिक्रिया हो सकती है। भर्ती मरीजों में यह खतरा ज्यादा होता है, क्योंकि उन्हें इंजेक्शन, एंटीबायोटिक, दर्द निवारक और अन्य दवाएं एक साथ दी जाती हैं।

इन गलतियों से बचें

दवा समय पर न लेना, बीच में दवा छोड़ देना, खुद से खुराक बदलना, पुरानी बची दवा दोबारा लेना या दूसरों की दवा लेना। भर्ती मरीजों या उनके परिजनों द्वारा घर से लाई गई दवा बिना बताए लेना भी खतरनाक हो सकता है। यदि दवा लेने के बाद तेज खुजली, सांस लेने में दिक्कत, चेहरे या होंठों में सूजन, अत्यधिक नींद, उलझन, लगातार उल्टी-दस्त, पेशाब कम होना या त्वचा पर चकते दिखें तो इसे नजरअंदाज न करें। घर पर इलाज कर रहे मरीज तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें और भर्ती मरीज बिना देर किए नर्स या डाक्टर को जानकारी दें।

बचाव के उपाय

  • दवाइयां पर्चे के अनुसार लें।
  • सभी चल रही दवाओं और एलर्जी की जानकारी डाक्टर को जरूर दें।
  • बिना पूछे कोई दवा न लें और दुष्प्रभाव दिखने पर तुरंत बताएं।
  • डिस्चार्ज के समय दवाओं की सूची और खुराक ठीक से समझ लेना जरूरी है।
  • सही जानकारी, सतर्कता और निगरानी से घर और अस्पताल दोनों जगह दवाओं के दुष्प्रभाव से काफी हद तक बचा जा सकता है।
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