अवारा पशु संरक्षित किए जा रहे हैं, नीलगाय बस की बात नहीं -बीडीओ
नीलगाय और अवारा पशुओं का आतंक किसानों के लिए बड़ी समस्या बन गया है। गेहूं, मटर और चने की बुवाई के बाद अंकुरित हो रही फसल को ये जानवर लगातार नुकसान पहुंचा रहे हैं, जिससे किसानों को भारी आर्थिक क्षति हो रही है।
पिछले 15-20 दिनों से किसान अपनी फसलों को बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। बेनीपुर गांव के किसान विजई सिंह ने बताया कि उन्होंने अपने खेत के चारों ओर तार की बाड़ लगाई थी, लेकिन नीलगाय और अन्य आवारा पशु दिन में भी खेतों में घुसकर फसल चट कर रहे हैं।
गया प्रसाद यादव ने कहा कि “मैं दिन-रात खेत में मचान बनाकर बैठता हूँ, फिर भी इन जानवरों को रोक पाना मुश्किल हो रहा है। फसल की लागत निकालना भी अब कठिन हो गया है।” यह स्थिति किसानों के लिए दोहरी मार साबित हो रही है।
शिव प्रसाद शुक्ल ने बताया कि छुट्टा पशुओं के कारण शुरुआती चरण में ही फसल को भारी नुकसान हो जाता है। कई बार तो पूरी फसल बर्बाद हो जाती है, जिसके बाद किसानों को दोबारा बुवाई करनी पड़ती है। उन्होंने स्थायी समाधान की मांग की है।
ब्लॉक के खंड विकास अधिकारी बृजेश सिंह ने इस समस्या को स्वीकार किया है। उन्होंने बताया कि अवारा पशुओं को नियंत्रित करने के लिए विशेष अभियान चलाकर उन्हें संरक्षित किया जा रहा है। नीलगाय की समस्या पर उन्होंने अपनी असमर्थता व्यक्त की है।





